Iran Houthi Bab al Mandab Blockade: अमेरिका और ईरान के बीच मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ता जा रहा है, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर दोनों देश के बीच कोई भी समझौता होता फिलहाल नजर नहीं आ रहा है। इसी बीच ईरान ने यमक के हूती विद्रोहियों से कहा कि अगर अमेरिकी सेना ईरान के पावर प्लांट पर हमला करता है, तो वो रेड सी से तेल ले जाने वाले मार्ग रास्तों को ब्लाक करने के लिए तैयार रहें। जानकारी के मुताबिक, ईरान इससे वैश्विक तेल सप्लाई को बाधित करके एक नया संकट पैदा करना चाहता है, ताकि तेल सप्लाई बाधित होने के स्थिति में दुनियाभर के देश अमेरिका पर दबाव बनाए। मामले से जुड़े जो सीनियक ईरानी अधिकारियों ने नाम जाहिर करने की शर्त पर बताया कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व में इसे लेकर चर्चा हुई है और यह संदेश हूती संगठनों तक पहुंचा दिया गया है।
ईरानी अधिकारियों ने बताया कि, ईरान ने हाल ही में यमन के हूती विद्रोहियों को एक महत्वपूर्ण संदेश भेजा था, जिसकी जानकारी अब तक सार्वजनिक नहीं हुई है। हालांकि, यह साफ नहीं है कि यह संदेश किस माध्यम से पहुंचाया गया और क्या इसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा मंगलवार को ईरान के पावर प्लांट पर संभावित हमले की चेतावनी दिए जाने के बाद भेजा गया था। इस पूरे घटनाक्रम पर ईरान के विदेश मंत्रालय और हूती संगठन के प्रवक्ता ने रॉयटर्स के सवालों का तत्काल कोई जवाब नहीं दिया। हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के आसपास अपनी सैन्य तैयारियां तेज कर दी हैं। ड्रोन, मिसाइलों और अन्य हथियारों की तैनाती पूरी कर ली गई है। हूती समूह से जुड़े एक सूत्र का दावा है कि यमन के पहाड़ी इलाकों, होदेइदाह और अदन की खाड़ी के सामने स्थित बाब अल-मंडेब क्षेत्र में हमले की पूरी तैयारी है। फिलहाल लड़ाके केवल अंतिम आदेश का इंतजार कर रहे हैं, जिसके बाद जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लाल सागर और बाब अल-मंडेब जलमार्ग की सुरक्षा प्रभावित होती है, तो इसका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। यह खतरा इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पहले से ही तनाव का केंद्र बना हुआ है।
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ऐसे में अगर हूती लाल सागर में जहाजों या बंदरगाहों पर हमला करते हैं, तो मध्य पूर्व के दो प्रमुख तेल निर्यात मार्ग एक साथ प्रभावित हो सकते हैं। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ने के साथ-साथ ईरान और अमेरिका के बीच व्यापक सैन्य टकराव की आशंका भी गहरा सकती है। हूतियों के करीबी एक अन्य सूत्र का कहना है कि यमन में मौजूद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के प्रतिनिधि यह तय करेंगे कि बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य को कब और किस रणनीति के तहत निशाना बनाया जाए।