प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राट्रपति व्लादिमीर पुतिन (सोर्स- सोशल मीडिया) 
विदेश

भारत-रूस की वर्षों पुरानी अटूट दोस्ती: रक्षा से ऊर्जा तक, साझेदारी हुई और भी मजबूत

India Russia partnership: भारत-रूस की वर्षों पुरानी अटूट दोस्ती अब मजबूत व्यापारिक साझेदारी की ओर बढ़ रही है। रक्षा सहयोग का लंबा इतिहास रहा है, जिसमें रूस ने हमेशा भारत का साथ दिया है।

प्रिया सिंह

India Russia defence energy ties: भारत और रूस के राजनयिक संबंध आज के नहीं, बल्कि सात दशकों से भी अधिक पुराने हैं। इन वर्षों में, रूस हमेशा भारत के लिए एक अत्यंत भरोसेमंद रणनीतिक मित्र और संकट में साथ देने वाला साझेदार साबित हुआ है। रक्षा क्षेत्र में शुरू हुई यह गहरी साझेदारी अब व्यापारिक और वैश्विक मंचों पर भी नए आयाम छू रही है, जो दोनों देशों के रिश्तों की मजबूती को दर्शाती है। यह वर्षों पुरानी दोस्ती अब एक मजबूत आर्थिक रिश्ते में बदल रही है।

वर्षों पुरानी दोस्ती का मजबूत आधार, सुरक्षा और विश्वास

भारत और रूस के बीच रिश्ते 1947 में राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद से ही बेहद खास रहे हैं। हालांकि शुरुआती दौर में व्यापारिक संबंध उतने मजबूत नहीं थे, लेकिन रणनीतिक साझेदारी के मामले में रूस ने हमेशा ही भारत का सबसे विश्वसनीय साथी बनकर साथ दिया है। सुरक्षा के मुद्दे पर रूस हमेशा भारत के साथ मजबूती से खड़ा रहा है, जो इस दोस्ती का आधार है।

संकट में रूस का अटूट समर्थन

दोनों देशों के संबंध सिर्फ दोस्ती तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह संकट के समय में समर्थन का एक उदाहरण है। चाहे 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान सोवियत संघ (रूस) की मध्यस्थता हो या 1971 के युद्ध में भारत का खुला समर्थन और 'मैत्री और सहयोग संधि', रूस ने हमेशा एक सच्चे मित्र की भूमिका निभाई है। परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी रूस भारत का एक पुराना और भरोसेमंद भागीदार रहा है, जिसने मार्च 2010 में एक महत्वपूर्ण सुरक्षा समझौते पर मुहर लगाई थी।

रक्षा सहयोग की दशकों पुरानी कहानी

रक्षा के क्षेत्र में भारत-रूस की साझेदारी की शुरुआत 1950 और 60 के दशक में हुई थी। यह सहयोग आज भी भारत की रक्षा शक्ति को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है। चीन और पाकिस्तान से लगातार मिल रही चुनौतियों के बीच रूस भारत का सबसे बड़ा रणनीतिक सहयोगी बना हुआ है। मिग-21 विमानों से लेकर एस-400 मिसाइल सिस्टम, सुखोई जेट और टी-90 टैंक जैसे प्रमुख रक्षा उपकरणों ने भारत की सैन्य ताकत को मजबूती दी है। अब दोनों देश मिलकर भारत में 'मेक इन इंडिया' के तहत भी हथियार बना रहे हैं।

व्यापारिक और वैश्विक मंच पर बढ़ता सहयोग

हाल के समय में इस दोस्ती में एक नया व्यापारिक आयाम भी जुड़ा है। जब अमेरिका ने भारत और रूस के बीच तेल व्यापार पर दबाव बनाने की कोशिश की, तब भी भारत ने स्पष्ट कर दिया कि वह किससे व्यापार करेगा, इसका फैसला कोई और देश नहीं कर सकता। यह भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और रूस के प्रति कमिटमेंट को दिखाता है। इसके अलावा, 'ग्लोबल साउथ' जैसे मंचों पर भी दोनों देश मिलकर अपने हितों को आगे बढ़ा रहे हैं। सांस्कृतिक रूप से भी, भारत का संगीत, नृत्य और फिल्में रूस में बहुत लोकप्रिय हैं, जो लोगों के बीच गहरे संबंध दर्शाते हैं।

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