श्रीलंका में ऑपरेशन 'सागर बंधु' अब भी जारी, फोटो (सो. आईएएनएस) 
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श्रीलंका में ऑपरेशन 'सागर बंधु' अब भी जारी, लोगों ने भारतीय सेना का जताया आभार

Cyclone Ditwah: तूफान दित्वाह से तबाह श्रीलंका में भारत का ऑपरेशन सागर बंधु अब भी जारी है। इस दौरान ने भारतीय सेना ने राहत, कनेक्टिविटी बहाली और मेडिकल सहायता से हजारों लोगों को राहत पहुंचाई।

अमन उपाध्याय

Operation Sagar Bandhu News In Hindi: श्रीलंका में आए भीषण तूफान दित्वाह ने देश के कई हिस्सों में भारी तबाही मचाई। बाढ़, भूस्खलन और क्षतिग्रस्त इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया। ऐसे मुश्किल समय में भारत सरकार ने एक भरोसेमंद पड़ोसी की भूमिका निभाते हुए तुरंत ऑपरेशन सागर बंधु की शुरुआत की और राहत कार्यों में सक्रिय भागीदारी की।

ऑपरेशन के तहत भारतीय सेना की इंजीनियर टास्क फोर्स लगातार क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों की मरम्मत में जुटी रही। विशेष रूप से बी-492 रोड, जो मध्य प्रांत के कैंडी को उवा प्रांत के बादुल्ला से जोड़ती है तूफान के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। इस सड़क के टूटने से स्थानीय लोगों का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया था।

बेली ब्रिज का तेजी से निर्माण

भारतीय सेना ने 15 किलोमीटर और 21 किलोमीटर के महत्वपूर्ण हिस्सों पर बेली ब्रिज का तेजी से निर्माण कर रोड कनेक्टिविटी को फिर से बहाल किया। इससे न सिर्फ यात्रा का समय कम हुआ बल्कि स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आवाजाही भी आसान हो गई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किए गए एक वीडियो में स्थानीय स्कूल की छात्रा ने भारतीय सेना का आभार जताते हुए कहा कि खराब पुल की वजह से उनका रास्ता बंद हो गया था लेकिन भारतीय जवानों ने आकर उनकी बड़ी मदद की।

स्वास्थ्य प्रणाली पर पड़ा दबाव

राहत प्रयास यहीं तक सीमित नहीं रहे। भारतीय सेना ने कैंडी जिले के पास महियांगनया में एक फील्ड हॉस्पिटल भी स्थापित किया जहां ट्रॉमा मैनेजमेंट, सर्जरी और सामान्य चिकित्सा सेवाएं प्रदान की गईं। इस मेडिकल सुविधा से प्रतिदिन करीब 1,000 से 1,200 मरीजों को लाभ मिला, जिससे स्थानीय स्वास्थ्य प्रणाली पर पड़ा दबाव काफी हद तक कम हुआ।

ऑपरेशन के लिए फिर से तैनात

समुद्री मोर्चे पर भी भारत ने त्वरित प्रतिक्रिया दी। भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस विक्रांत और आईएनएस उदयगिरी आपात स्थिति में सहायता देने वाले पहले विदेशी जहाजों में शामिल रहे। ये दोनों पोत पहले से ही श्रीलंका में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2025 के लिए मौजूद थे और लैंडफॉल के तुरंत बाद एचएडीआर ऑपरेशन के लिए फिर से तैनात कर दिए गए।

कुल मिलाकर, ऑपरेशन सागर बंधु ने यह साबित किया कि आपदा की घड़ी में भारत न सिर्फ त्वरित मदद करता है, बल्कि जमीनी स्तर पर स्थायी समाधान भी उपलब्ध कराता है। इससे भारत-श्रीलंका के बीच मानवीय और कूटनीतिक रिश्ते और मजबूत हुए हैं।

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