India Armenia Defense Partnership: भारत ने आर्मेनिया के साथ अपनी रणनीतिक और रक्षा साझेदारी को नए मुकाम पर पहुंचा दिया है। इसके साथ ही भारत का कुल हथियार और रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक के सर्वकालिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है।
भारतीय रक्षा क्षेत्र में आई इस ऐतिहासिक उछाल में आर्मेनिया के साथ लगातार गहराता द्विपक्षीय सैन्य सहयोग एक बड़ा और मुख्य कारण बनकर सामने आया है। दोनों देशों ने हाल ही में रक्षा अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास, नवाचार और संयुक्त उत्पादन को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
भारत का कुल हथियार और रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में 3.56 बिलियन यूरो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2024-25 के 2.39 बिलियन यूरो के मुकाबले करीब 63 फीसदी की वृद्धि को दिखाता है।
केंद्र सरकार के अनुसार, वैश्विक बाजार में भारतीय रक्षा उपकरणों और सैन्य प्रणालियों की मांग लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में 145 भारतीय निर्यातक 80 से अधिक देशों को रक्षा सामग्री और सैन्य उपकरणों की आपूर्ति कर रहे हैं।
भारत के रक्षा उत्पाद खरीदने वाले देशों में अमेरिका, फ्रांस, मालदीव, मॉरीशस, सेशेल्स और आर्मेनिया प्रमुख रूप से शामिल हैं। ऑस्ट्रिया की सैन्य पत्रिका ‘मिलिटार एक्चुएल’ ने SIPRI के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि भारत ने कम से कम 23 देशों को प्रमुख पारंपरिक हथियारों की आपूर्ति की है।
भारत और आर्मेनिया के बीच रक्षा और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में हाल के वर्षों में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इसी कड़ी में भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 16 और 17 अगस्त को आर्मेनिया की राजधानी येरेवन की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा की।
इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रक्षा अनुसंधान, विकास, नवाचार और संयुक्त उत्पादन में सहयोग को लेकर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस MoU के जरिए दोनों देशों के बीच रक्षा तकनीक और सैन्य विनिर्माण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का रास्ता तैयार हुआ है।
यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब भारत अपने रक्षा उद्योग की घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा है। आर्मेनिया के साथ सहयोग इसी व्यापक रक्षा साझेदारी का हिस्सा है।
भारत और आर्मेनिया के बीच औपचारिक रक्षा सहयोग की शुरुआत मार्च 2020 में एक महत्वपूर्ण सौदे से हुई थी। उस समय आर्मेनिया ने करीब 35 मिलियन यूरो की कीमत में चार स्वाति आर्टिलरी लोकेटिंग रडार खरीदने का अनुबंध किया था।
आर्मेनिया इस भारतीय सैन्य तकनीक का पहला विदेशी ग्राहक बना था। इस सौदे के जरिए भारत ने अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार में अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया। रिपोर्ट के मुताबिक, इस सौदे में भारत ने पारंपरिक रूसी और पोलिश आपूर्तिकर्ताओं को पीछे छोड़ा था।
भारत और आर्मेनिया के रक्षा संबंधों को 2020 के नागोर्नो कराबाख युद्ध के बाद नई गति मिली। करीब 44 दिनों तक चले इस संघर्ष ने आर्मेनिया की सुरक्षा जरूरतों और रक्षा खरीद रणनीति को प्रभावित किया।
युद्ध के बाद आर्मेनिया और रूस के संबंधों में दूरी बढ़ने की बात सामने आई। इसके बाद आर्मेनिया ने अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत के साथ सहयोग बढ़ाया।
भारत के लिए भी आर्मेनिया के साथ बढ़ती साझेदारी रक्षा निर्यात और सैन्य तकनीक के अंतरराष्ट्रीय विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण है। रक्षा अनुसंधान, संयुक्त उत्पादन और आधुनिक सैन्य प्रणालियों में सहयोग दोनों देशों के संबंधों का प्रमुख हिस्सा बनता जा रहा है।