फैज हमीद को 14 साल की जेल (सोर्स- सोशल मीडिया) 
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जिसे आर्मी चीफ बनाना चाहते थे इमरान...उसे मुनीर ने भेजा जेल, कोर्ट मार्शल के साथ सजा का ऐलान

Pakistan News: पाकिस्तान के पूर्व ISI प्रमुख फैज हमीद को गुप्त दस्तावेजों के उल्लंघन और भ्रष्टाचार के आरोप में 14 साल की सजा सुनाई गई। यह पहला मामला है जब किसी ISI प्रमुख को कोर्ट मार्शल किया गया।

अक्षय साहू

Faiz Hameed Court Martial: पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के पूर्व प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) फैज हमीद को कोर्ट मार्शल किया गया है। उन्हें सीक्रेट एक्ट के उल्लंघन के आरोप में 14 साल की जेल की सजा सुनाई गई है। यह पहली बार है जब किसी ISI के हेड रहे अधिकारी को इस तरह की सजा मिली है। फैज हमीद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के करीबी माना जाता था।

माना जा रहा है कि फैज हमीद के खिलाफ कार्रवाई पाकिस्तानी सेना के प्रमुख आसिम मुनीर के इशारे पर की गई है। सेना प्रमुख इमरान खान के किसी भी करीबी अधिकारी को पसंद नहीं करते हैं। इसके चलते इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने भी इसे बदले की कार्रवाई करार दिया है।

14 साल की कैद की जेल

पाकिस्तानी सेना ने गुरुवार, 11 दिसंबर 2025 को बयान जारी कर कहा कि फैज हमीद पर अपने पद और अधिकारों का दुरुपयोग करने के आरोप लगे हैं। उन पर देश के गुप्त दस्तावेजों के उल्लंघन और कई अन्य गंभीर आरोप भी हैं। इसके अलावा, पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट में 2023 में सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, फैज पर एक निजी रियल एस्टेट डेवलपर के व्यवसाय पर छापेमारी करने के आरोप भी लगे हैं। इन सभी आरोपों के लिए उन्हें 14 साल की कैद की सजा सुनाई गई है।

ISI के पूर्व प्रमुख ने इमरान खान के कार्यकाल में अपनी सेवाएं दी थीं। पाकिस्तान की सेना के जनसंपर्क विभाग ISPR ने बयान में कहा कि फैज हमीद ने उस समय इमरान खान के लिए काम किया, जब वे प्रधानमंत्री थे। बयान में यह भी कहा गया कि आरोपी को राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने और लोगों को नुकसान पहुंचाने के लिए दोषी पाया गया। लंबी और कठिन कानूनी प्रक्रिया के बाद फैज हमीद को सभी आरोपों में दोषी ठहराया गया और 14 साल की कड़ी सजा सुनाई गई।

लिया था प्री-मैच्योर रिटायरमेंट

इमरान खान की सरकार गिरने के कुछ समय बाद ही फैज हमीद ने ISI से प्री-मैच्योर रिटायरमेंट ले लिया था। वह इमरान खान के कट्टर समर्थक माने जाते थे और एक समय उन्हें पाकिस्तानी सेना के प्रमुख पद का दावेदार भी माना जाता था। रिटायरमेंट के बाद, फैज के खिलाफ पाकिस्तान आर्मी एक्ट के कई उल्लंघनों के मामले दर्ज किए गए। इसके परिणामस्वरूप उन्हें सभी रैंक से वंचित कर दिया गया।

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