इथोपिया इरिट्रिया तनाव, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

दुनिया में एक और जंग का खतरा! इथोपिया और इरिट्रिया बॉर्डर पर सेना तैनात, क्या फिर छिड़ेगा भीषण युद्ध?

Ethiopia Eritrea War: अफ्रीका के 'हॉर्न ऑफ अफ्रीका' क्षेत्र में तनाव चरम पर है। इथोपिया ने इरिट्रिया सीमा पर सैनिकों की लामबंदी तेज कर दी है, जिससे एक नए बड़े युद्ध की आशंका गहरा गई है।

अमन उपाध्याय

Tensions In African Countries: दुनिया पहले से ही रूस-यूक्रेन और मध्य पूर्व के संघर्षों से जूझ रही है और अब अफ्रीकी महाद्वीप में जंग का एक और नया मोर्चा खुलता नजर आ रहा है। अफ्रीकी देश इथोपिया ने अपने पड़ोसी मुल्क इरिट्रिया के साथ युद्ध की पूरी तैयारी कर ली है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, इथोपिया ने इरिट्रिया सीमा पर अपने सैनिकों की लामबंदी और सैन्य हलचल को काफी तेज कर दिया है जिससे इस क्षेत्र में अस्थिरता का खतरा बढ़ गया है।

क्या है तनाव की वजह

इथोपिया की इस सैन्य लामबंदी के पीछे सबसे बड़ा कारण आंतरिक सुरक्षा और विद्रोह है। इथोपिया सरकार का आरोप है कि इरिट्रिया उसके देश के बागियों, विशेष रूप से 'तिग्ने विद्रोहियों' को हथियारों की सप्लाई कर रहा है। इथोपिया का कहना है कि इन विद्रोहियों को इरिट्रिया की सेना से मिल रही मदद के कारण ही देश में हिंसा और अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। ऐसे में इथोपिया अब इरिट्रिया को 'सबक सिखाने' और पश्चिमी सीमा पर अपना पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने के मूड में नजर आ रहा है।

खूनी इतिहास और गृहयुद्ध का साया

इथोपिया और इरिट्रिया का इतिहास काफी संघर्षपूर्ण रहा है। गौरतलब है कि 1993 में इथोपिया से अलग होकर ही इरिट्रिया एक स्वतंत्र देश बना था। इसके बाद 1998 में दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर भीषण युद्ध हुआ था जो दो सालों तक चला और इसमें करीब 1 लाख लोग मारे गए थे। हालिया इतिहास की बात करें तो 2020 से 2022 के बीच इथोपिया में हुए गृहयुद्ध में इरिट्रिया समर्थित तिग्ने सेना ने भारी तबाही मचाई थी जिसमें करीब 6 लाख लोगों की जान चली गई थी। हालांकि बाद में युद्धविराम हुआ लेकिन वह पूरी तरह सफल नहीं हो पाया और अब फिर से दोनों देश आमने-सामने हैं।

राजनयिकों की बढ़ती चिंता

पश्चिमी देशों के राजनयिक इस घटनाक्रम पर पैनी नजर रखे हुए हैं और उनकी चिंताएं बढ़ गई हैं। समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, एक राजनयिक ने बताया कि दोनों ओर से घेराबंदी की जा रही है एक तरफ इथोपिया की नियमित सेना है तो दूसरी तरफ इरिट्रिया समर्थित तिग्ने लड़ाके जुटे हुए हैं। जानकारों का मानना है कि इस बार स्थिति अधिक गंभीर है क्योंकि इथोपिया की सेना पूरी तरह से सैन्य कार्रवाई की तैयारी में है जिससे किसी भी क्षण जंग छिड़ सकती है।

सांस्कृतिक रूप से देखें तो ये दोनों ही मुल्क ईसाई बहुल हैं जहां मुस्लिम समुदाय अल्पसंख्यक आबादी के रूप में रहता है। अब देखना यह है कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस संभावित युद्ध को रोकने में सफल हो पाता है या फिर अफ्रीका का यह हिस्सा एक बार फिर विनाशकारी हिंसा की चपेट में आ जाएगा।

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