Trump-Xi Meeting Result: वाशिंगटन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच हुई उच्चस्तरीय बातचीत में चीन को बड़े रणनीतिक और कूटनीतिक फायदे हासिल हुए हैं। जिनपिंग ने न केवल अमेरिका से बराबरी का दर्जा हासिल किया, बल्कि ताइवान, व्यापार और तकनीक जैसे अहम मोर्चों पर भी अपनी स्थिति मजबूत कर ली।
खास बात यह है कि रेड कारपेट बिछाने के बाद भी अमेरिका को कुछ हासिल नहीं हुआ। चीन के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश स्पष्ट रूप से गया कि ट्रंप प्रशासन के कड़े तेवरों के बावजूद बीजिंग अपनी शर्तों पर वार्ता करने में सक्षम है।
अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले भारी टैरिफ और आर्थिक पाबंदियों से चीन को बड़ी राहत मिली है। दोनों देशों के बीच जारी ट्रेड दूस (व्यापार युद्धविराम) की अवधि को दो महीने बढ़ाकर 10 जनवरी 2027 तक कर दिया गया है, जिससे चीन के निर्यात आधारित उद्योग को स्थिरता मिलेगी।
बीजिंग की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रहने वाले ताइवान के मुद्दे पर भी चीन का पलड़ा भारी रहा। अमेरिका द्वारा ताइवान को दिए जाने वाले 14 अरब डॉलर के हथियार बिक्री पैकेज को इस बैठक के दौरान मंजूरी नहीं मिली।
इसके अतिरिक्त, शी जिनपिंग ने ट्रंप पर 'ताइवान की स्वतंत्रता का विरोध' करने का रुख अपनाने के लिए कूटनीतिक दबाव बनाया, जिससे ताइपे और अमेरिकी सीनेट में गहरी चिंता की लहर दौड़ गई है।
ट्रंप और शी जिनपिंग इससे पहले सात बार मिल चुके हैं। यह शी की अमेरिका की दूसरी राजकीय यात्रा और एक दशक से ज्यादा समय में पहली वाशिंगटन यात्रा है। दोनों नेताओं में से किसी ने भी यह नहीं कहा कि एडवांस चिप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सैन्य शक्ति या एशिया में प्रभाव को लेकर प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई है। शी जिनपिंग ने कहा कि प्रतिस्पर्धा 'स्वस्थ' होनी चाहिए और 'दायरे में रहनी चाहिए'।
व्यापार के मोर्चे पर सबसे स्पष्ट नतीजा सामने आया। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि नवंबर में खत्म होने जा रहे टैरिफ ट्रूस (व्यापारिक युद्धविराम) को 10 जनवरी तक बढ़ा दिया गया है।
इस व्यवस्था के तहत कुछ अमेरिकी टैरिफ निलंबित रहेंगे जबकि चीन अमेरिकी निर्माताओं के लिए जरूरी रेयर-अर्थ मिनरल्स की सप्लाई जारी रखेगा। यह समय खरीदने जैसा है, कोई बड़ा आर्थिक समझौता नहीं। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बैठक से पहले रिपोर्ट किया था कि सेमीकंडक्टर एक्सपोर्ट कंट्रोल जैसे कड़े मुद्दे एजेंडे में नहीं हैं।
एआई पर भी यही पैटर्न दिखा। शी जिनपिंग ने कहा कि दोनों देशों में एआई को अच्छे के लिए विकसित करने की क्षमता और जिम्मेदारी है। अमेरिका ने एआई हॉटलाइन जैसे चैनल पर चर्चा की है लेकिन कोई बाध्यकारी समझौता नहीं हुआ।
ताइवान, ईरान और मानवाधिकार जैसे मुद्दों पर भी कोई नया फॉर्मूला नहीं निकला। डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह शिखर वार्ता कूटनीति को दिखाती है, तो शी जिनपिंग के लिए यह बराबरी के सम्मान का संकेत है। इस दौरान मेलानिया ट्रंप और पेंग लियुआन ने स्मिथसोनियन म्यूजियम का दौरा कर सांस्कृतिक कूटनीति को आगे बढ़ाया।