यूरोपीय देशों से ट्रंप नाराज (सोर्स- सोशल मीडिया) 
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यूरोप पर भारी पड़ा ट्रंप-पुतिन का याराना! US राष्ट्रपति के निशाने पर यूरोपीय देश, कहा- कमजोर लोग...

Russia Ukraine War: डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोप के नेताओं को कमजोर बताया और कहा कि प्रवासन नीतियों में बदलाव नहीं किया गया तो यूरपीय देश कठिनाइयों में फंस सकते हैं, जबकि यूक्रेन संकट भी जारी है।

अक्षय साहू

Trump Angry on European Countries:अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यूरोप के कई देशों के नेता कमजोर हैं और ये देश धीरे-धीरे पतन की ओर बढ़ रहे हैं। यह बयान उन्होंने मीडिया को इंटरव्यू में मंगलवार को दिया। ट्रंप ने कहा, मुझे लगता है कि वे कमजोर हैं और बहुत ज्यादा पॉलिटिकली करेक्ट होना चाहते हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि क्या करना चाहिए। यूरोप खुद भी सही रास्ता नहीं ढूंढ पा रहा।

इसके साथ ही ट्रंप ने यूरोप की बॉर्डर पॉलिसी पर भी चिंता जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यूरोप ने अपनी इमिग्रेशन नीतियों को नहीं बदला, तो कुछ देश भविष्य में ठीक से टिक भी नहीं पाएंगे। उनका कहना था कि लंदन और पेरिस जैसे शहर मध्य-पूर्व और अफ्रीका से आने वाले प्रवासियों के दबाव में हैं।

शांति समझौत नहीं होने के जिम्मेदार

ट्रंप की आलोचना को रूस-यूक्रेन शांति समझौते में उनकी विफलता से जोड़ा जा रहा है। एक दिन पहले ही यूरोपीय नेता लंदन में यूक्रेन में युद्ध रोकने के लिए बैठक कर चुके थे। ट्रंप बार-बार संकेत दे रहे हैं कि उनका शांति प्रस्ताव यूक्रेन को बिना विरोध किए मान लेना चाहिए। जबकि यूरोप और यूक्रेन का मानना है कि यह प्रस्ताव रूस के पक्ष में ज्यादा झुका हुआ है।

यूक्रेन संकट पर ट्रंप ने यूरोपीय नेताओं की भूमिका को कम आंकते हुए कहा कि वे सिर्फ बातें करते हैं, पर कोई ठोस परिणाम नहीं निकलता और युद्ध जारी रहता है। उन्होंने कहा कि रूस स्थिति में स्पष्ट रूप से मजबूत है। साथ ही, उन्होंने यूक्रेन में नए चुनाव कराने की अपनी मांग दोहराई। ट्रंप ने रविवार को यह भी कहा कि अमेरिका की शांति योजना को रूस मान चुका है और यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की इस रास्ते में सबसे बड़ी बाधा हैं, हालांकि इसके कोई सबूत नहीं पेश किए।

यूरोपीय नेताओं से बढ़ी दूरी

पिछले गुरुवार अमेरिकी प्रशासन ने राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति जारी की। इसमें कहा गया कि यूरोप में प्रवासन और अन्य संवेदनशील मामलों में पुरानी नीतियों के खिलाफ प्रतिरोध किया जाएगा। इस पर यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, कोई भी मित्र देश किसी अन्य मित्र देश के लोकतंत्र या घरेलू नीतियों में हस्तक्षेप करने की धमकी नहीं देता।

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