स्टीफन मिलर की फोटो। सोर्स: इंटरनेट
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स्टीफन मिलर कौन हैं? जिन्हें ट्रंप ने चुनाव हारने के बाद चीफ ऑफ स्टाफ बनाया

Donald Trump Appoints Stephen Miller: मिडटर्म चुनाव में झटके के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने स्टीफन मिलर को नया व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया। जानिए कौन हैं मिलर और क्यों विवादों में हैं।

अमन कुमार पाण्डेय

Highlights:

  • सुसी वाइल्स की जगह 9 नवंबर से व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ की जिम्मेदारी संभालेंगे स्टीफन मिलर।

  • ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन नीतियों के प्रमुख रणनीतिकार और राष्ट्रपति के सबसे भरोसेमंद सलाहकारों में शामिल हैं मिलर।

  • रो खन्ना, रॉबर्ट गार्सिया और गेविन न्यूजॉम ने नियुक्ति की आलोचना कर ट्रंप पर निशाना साधा।

Stephen Miller White House Chief of Staff: अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। ट्रंप ने अपने सबसे भरोसेमंद और आक्रामक सलाहकारों में शामिल स्टीफन मिलर को नया चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया है। मिलर 9 नवंबर से यह जिम्मेदारी संभालेंगे। वह सुसी वाइल्स की जगह लेंगे, जिन्होंने गुरुवार रात अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

मिलर की नियुक्ति को ट्रंप के 'अमेरिका फर्स्ट' एजेंडे को और आक्रामक तरीके से आगे बढ़ाने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। खास बात यह है कि मिडटर्म चुनाव में मतदाताओं की नाराजगी के बावजूद ट्रंप ने अपनी नीतियों में नरमी दिखाने के बजाय एक ऐसे सहयोगी को सबसे अहम प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपी है, जो सख्त इमिग्रेशन नीतियों का प्रमुख चेहरा रहा है।

कौन हैं स्टीफन मिलर, जिन्हें ट्रंप ने सौंपी बड़ी जिम्मेदारी?

41 वर्षीय स्टीफन मिलर लंबे समय से ट्रंप के करीबी सहयोगी और रणनीतिकार रहे हैं। वह 2016 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान ट्रंप की टीम से जुड़े थे। उस समय उन्होंने ट्रंप के भाषण लेखक के रूप में काम किया था। इसके बाद वह उनके आंतरिक सलाहकार समूह का अहम हिस्सा बन गए।

ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में मिलर डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ (पॉलिसी) और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनकी सबसे बड़ी पहचान अमेरिका की इमिग्रेशन नीति को सख्त बनाने के पीछे प्रमुख रणनीतिकार के रूप में रही है।

ट्रंप ने उनकी नियुक्ति की घोषणा करते हुए कहा कि मिलर शुरुआत से उनके साथ रहे हैं। वह राजनीति को अच्छी तरह समझते हैं और नई जिम्मेदारी में शानदार काम करेंगे।

मिलर ने भी इस नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनका लक्ष्य राष्ट्रपति का पूरी क्षमता और समर्पण के साथ समर्थन करना और अमेरिकी गणराज्य की रक्षा करना है।

सुसी वाइल्स ने क्यों छोड़ा पद?

सुसी वाइल्स ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। वह इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला थीं। ट्रंप ने उनके काम की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने शानदार काम किया है और आगे भी उनके राजनीतिक संगठन से जुड़ी रहेंगी।

ट्रंप ने बताया कि वाइल्स को अब प्रशासन के राजनीतिक ढांचे की जिम्मेदारी दी जाएगी। वह पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना कर रही थीं। मार्च 2026 में उन्होंने सार्वजनिक रूप से बताया था कि उन्हें ब्रेस्ट कैंसर है। हालांकि, इलाज के बाद उन्होंने हाल ही में खुद को कैंसर मुक्त बताया था।

मिलर की पत्नी भी ट्रंप खेमे में प्रभावशाली

स्टीफन मिलर की पत्नी केटी मिलर भी अमेरिकी राजनीति में सक्रिय और ट्रंप खेमे की प्रभावशाली हस्ती हैं। वह एलन मस्क के नेतृत्व वाले डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE) की प्रवक्ता रह चुकी हैं।

केटी मिलर MAGA आंदोलन से जुड़ी रही हैं। ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप के दावों का सोशल मीडिया पर समर्थन करने के कारण भी वह चर्चा में आई थीं।

मिलर की नियुक्ति पर डेमोक्रेट्स ने उठाए सवाल

मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद मिलर की नियुक्ति को लेकर डेमोक्रेटिक नेताओं ने ट्रंप पर निशाना साधा है। डेमोक्रेट सांसद रॉबर्ट गार्सिया ने कहा कि ट्रंप चुनावी नतीजों से मिले जनता के संदेश को समझने के बजाय अपनी नीतियों को और सख्त कर रहे हैं।

भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने भी नियुक्ति की आलोचना की। उनका कहना है कि यह उन प्रवासी समुदायों के खिलाफ कार्रवाई जैसा है, जिन्होंने चुनाव में ट्रंप प्रशासन का विरोध किया था।

कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूजॉम ने मिलर को व्हाइट हाउस के सबसे कट्टर और विवादित चेहरों में से एक बताते हुए उनकी पदोन्नति की निंदा की।

दरअसल, मिडटर्म चुनाव के दौरान हुए सर्वे में बड़ी संख्या में मतदाताओं ने ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन कार्रवाई को जरूरत से ज्यादा सख्त बताया था। ऐसे में मिलर की नियुक्ति से साफ संकेत मिलता है कि ट्रंप फिलहाल अपने एजेंडे से पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। आने वाले दो वर्षों में उनकी सरकार इमिग्रेशन और कार्यकारी शक्तियों के इस्तेमाल को लेकर और आक्रामक रुख अपना सकती है।

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