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E20 को लेकर तेल कंपनियों ने कर्नाटक सरकार के दावों का खंडन किया
कंपनी ने कहा- इथेनॉल की मात्रा 19 से 21 प्रतिशत के बीच होनी चाहिए।
उन्होंने कर्नाटक सरकार की लैब रिपोर्ट पर सवाल उठाया।
E20 Fuel Program: इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड- इन तीन सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने कर्नाटक सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता मामले और विधिक माप विज्ञान विभाग द्वारा जारी उस प्रेस विज्ञप्ति पर ध्यान दिया है, जिसमें दावा किया गया है कि राज्य के कुछ खुदरा केंद्रों पर बेचे जाने वाले पेट्रोल में 26% से 31% तक इथेनॉल है। इन तीनों कंपनियों ने स्पष्ट किया कि ये दावे निर्धारित कानूनी और तकनीकी प्रक्रियाओं के अनुसार की गई जांच से साबित नहीं होते हैं।
कर्नाटक सहित पूरे देश में इन तीनों कंपनियों द्वारा सप्लाई किया जाने वाला E20 पेट्रोल, 'ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स' के इथेनॉल-मिश्रित मोटर गैसोलीन के मानक 'IS 17021' के अनुरूप है। कंपनियों ने अक्टूबर 2026 की प्रक्रिया के लिए अपनाए गए सैंपलिंग के तरीके और कार्यप्रणाली पर चिंता जताई है। 'आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955' के तहत जारी 'मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल (आपूर्ति, वितरण का विनियमन और कदाचार की रोकथाम) आदेश, 2005' और 'मार्केटिंग डिसिप्लिन गाइडलाइंस (MDG) 2024' में नमूने लेने, उन्हें सुरक्षित रखने, जांच करने और परिणामों की जानकारी देने के लिए एक तय प्रक्रिया बताई गई है।
इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने संयुक्त बयान में कर्नाटक सरकार के दावों का खंडन किया है।
कंपनियों ने कहा कि उनके द्वारा सप्लाई किया जा रहा E20 पेट्रोल भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के मानक IS 17021 के अनुरूप है। इसमें इथेनॉल की मात्रा 19 से 21 प्रतिशत के बीच होनी चाहिए।
उन्होंने कर्नाटक सरकार की लैब रिपोर्ट पर सवाल उठाया। कंपनियों का कहना है कि राज्य सरकार की जांच निर्धारित वैधानिक और तकनीकी प्रक्रिया के अनुसार नहीं की गई।
अपनी तरफ से उन्होंने 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 893 सैंपलों की जांच करवाई। इनमें कर्नाटक के 56 सैंपल भी शामिल थे। सभी में इथेनॉल की मात्रा 19-21 प्रतिशत के बीच पाई गई। कर्नाटक में औसत 19.30 प्रतिशत रहा।
कंपनियों ने कर्नाटक सरकार से अनुरोध किया है कि वे पूरा सैंपलिंग दस्तावेज, आउटलेट-वाइज लैब रिपोर्ट और जांच की पूरी पद्धति साझा करें।
साथ ही, वे प्रति-सैंपल (counterpart samples) की स्वतंत्र जांच भी करवाना चाहते हैं, जिसमें राज्य सरकार और तेल कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद रहें।
इस प्रक्रिया के अनुसार, एक-एक लीटर के छह नमूने लिए जाने चाहिए। इनमें से दो नमूने डीलर को रसीद के बदले दिए जाते हैं, दो नमूने तेल कंपनी या विभाग अपने पास रखता है, और दो नमूने 'कंट्रोल ऑर्डर' की अनुसूची III में बताई गई या आधिकारिक राजपत्र (गजट) में अधिसूचित प्रयोगशाला में भेजे जाते हैं। नमूनों के लेबल पर सभी संबंधित पक्षों के संयुक्त हस्ताक्षर होने चाहिए, और जांच के परिणाम एक तय समय-सीमा के भीतर डीलर और तेल कंपनी को बता दिए जाने चाहिए।
तीनों OMC ने बताया कि सितंबर 2026 की प्रक्रिया के दौरान लिए गए नमूनों को स्टेट लेवल कोऑर्डिनेटर के जरिए OMC की तय प्रयोगशालाओं में भेजा गया था और MDG 2024 के तहत जरूरी क्वालिटी मानकों के लिए उनकी जांच की गई थी।