ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध (सोर्स-सोशल मीडिया) 
विदेश

ईरान युद्ध का कानूनी सच: क्या अमेरिका और इजरायल का हमला अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है?

International Law War: कानूनी विशेषज्ञों ने ईरान पर US-इजरायल के हमलों की वैधता पर सवाल उठाए हैं। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन और निर्दोषों की मौत ने इस वैश्विक संघर्ष को और गंभीर बना दिया है।

प्रिया सिंह

US Israel Iran War Legality: ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी इस जंग ने पूरी दुनिया को एक बहुत ही खतरनाक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए दोनों पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन की अपील की है। अमेरिका और इजरायल इसे अपनी आत्मरक्षा बता रहे हैं, जबकि कानूनी विशेषज्ञ इसके पीछे के ठोस सबूतों पर सवाल उठा रहे हैं। इस युद्ध की मानवीय कीमत अब मासूम बच्चों और आम नागरिकों की जान के साथ चुकानी पड़ रही है।

ट्रंप के दावे और हकीकत

28 फरवरी को बमबारी शुरू करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर परमाणु हथियार बनाने का गंभीर आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया कि ईरान की मिसाइलें अमेरिकी सहयोगियों और स्वयं अमेरिकी जमीन के लिए एक बड़ा खतरा बन सकती हैं। हालांकि, आईएईए के प्रमुख राफ़ेल ग्रोसी का कहना है कि उन्हें परमाणु हथियार बनाने की किसी संगठित योजना का कोई सबूत नहीं मिला है।

आत्मरक्षा या गैर-कानूनी हमला?

संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 2(4) किसी भी देश के खिलाफ बल प्रयोग पर सख्त प्रतिबंध लगाता है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, आत्मरक्षा में हमला तभी जायज है जब सामने से हमले की आशंका का कोई ठोस और निर्विवाद सबूत मौजूद हो। सर ज्योफ़्री नाइस जैसे वकीलों का मानना है कि अब तक ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया गया है, जिससे यह युद्ध गैर-कानूनी लग रहा है।

मासूमों की जान और तबाही

इस खूनी संघर्ष में हताहतों की संख्या लगातार बढ़ रही है और अब तक 780 से ज्यादा ईरानी नागरिक मारे जा चुके हैं। दक्षिणी ईरान के मीनाब में एक स्कूल पर हुए कथित हमले में 165 लड़कियों और स्टाफ की मौत ने सबको झकझोर दिया है। लेबनान में भी इजरायली हमलों में 50 से अधिक लोगों की जान गई है, जिससे मानवीय संकट और गहराता जा रहा है।

ईरान की जवाबी कार्रवाई

ईरान ने अपनी सुरक्षा का हवाला देते हुए उन खाड़ी देशों पर बमबारी की है जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान की जवाबी कार्रवाई भी अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हो सकती है क्योंकि यह बहुत ही अंधाधुंध है। दुबई के मशहूर होटल जैसे नागरिक ठिकानों पर हमले करना सैन्य लक्ष्यों और आनुपातिकता के नियमों के बिल्कुल खिलाफ है।

भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा

कानूनी विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर शक्तिशाली देश इस तरह बिना परिणाम भुगते कानून तोड़ते रहे, तो पूरी वैश्विक व्यवस्था ढह सकती है। इससे भविष्य में अन्य देशों को भी विस्तारवादी कदम उठाने और बल प्रयोग करने का एक गलत और खतरनाक मौका मिल जाएगा। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी व्यवस्था की जगह अब 'ताकतवर का ही कानून' वाली दुनिया लेने का डर सता रहा है।

7 अक्टूबर को जनसेवा के 25 साल पूरे करेंगे PM नरेंद्र मोदी, BJP अध्यक्ष नितिन नबीन ने गिनाईं उपलब्धियां

Telangana BRS Protest: KTR-हरीश राव समेत BRS नेताओं पर FIR दर्ज, महिला पुलिसकर्मियों से बदसलूकी का आरोप

PNB नकली नोट कांड: 17.29 करोड़ मामले में NIA की जांच तेज, मैनेजर की गिरफ्तारी के बाद नेटवर्क खंगाल रही एजेंसी

सत्य निकेतन हादसे में PG ऑपरेटर सुधांशु गिरफ्तार, पुलिस रिमांड में सामने आया बिल्डिंग का पूरा कनेक्शन

झगड़ा लगा गए धीरेंद्र शास्त्री, बंगाल में नॉन वेज पर सियासी संग्राम, दिलीप घोष ने कांग्रेस की FIR पर उठाए सवाल