चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (सोर्स- IANS)
विदेश

BRICS Summit: शी जिनपिंग का बयान- मिडिल-ईस्ट में शांति और स्थिरता के लिए BRICS देशों से मिलकर काम करेगा चीन

China Middle East Peace: 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि चीन मिडिल ईस्ट में शांति और स्थिरता लाने के लिए ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।

प्रिया सिंह

BRICS Summit Xi Jinping China On Middle East Peace: नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स समिट में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि चीन मिडिल ईस्ट और खाड़ी क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए ब्रिक्स के अन्य मेंबर देशों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।

मिडिल ईस्ट में शांति पर शी जिनपिंग का बयान

18वें ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेने नई दिल्ली पहुंचे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि चीन खाड़ी क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने में अपनी उचित भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

सिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, शी जिनपिंग ने कहा कि चीन इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए ब्रिक्स के अन्य मेंबर्स के साथ मिलकर काम करेगा। उनका यह बयान ऐसे में समय आया है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष और तनाव लगातार चिंता का विषय बना हुआ है।

युद्ध से लोगों और इंटरनेशनल कम्युनिटी को नुकसान

ब्रिक्स समिट के दौरान शी जिनपिंग ने मिडिल ईस्ट में जारी वॉर को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के कारण पूरे क्षेत्र के लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

चीनी राष्ट्रपति के मुताबिक, जारी हिंसा न केवल रीजनल स्टेबिलिटी के लिए चैलेंज है, बल्कि इंटरनेशनल कम्युनिटी के साझा हितों और ग्लोबल पीस की भावना के भी खिलाफ है। ऐसे में चीन ब्रिक्स सहयोगियों के साथ मिलकर खाड़ी क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने की कोशिश करेगा।

गलवान के बाद सात साल में पहली भारत यात्रा

शी जिनपिंग का यह भारत दौरा डिप्लोमैटिक लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। गलवान घाटी में हुई मिलिट्री झड़प के बाद पिछले सात वर्षों में यह उनका पहला भारत दौरा है।

18वें ब्रिक्स समिट के लिए नई दिल्ली पहुंचे चीनी राष्ट्रपति की मौजूदगी ने इंटरनेशनल लेवल पर भी ध्यान खींचा है। ऐसे समय में मिडिल ईस्ट को लेकर उनका पीस और कोऑपरेशन का बयान भारत में आयोजित ब्रिक्स मीटिंग के व्यापक डिप्लोमैटिक महत्व को भी दर्शाता है।

सुबह 4 बजे तक चली मैराथन बातचीत

ब्रिक्स समिट के पहले दिन भारत के लिए एक अहम डिप्लोमैटिक उपलब्धि भी सामने आई। पश्चिम एशिया में तनाव और मेंबर देशों के बीच अलग-अलग रुख के बावजूद सभी ब्रिक्स मेंबर जॉइंट स्टेटमेंट पर सहमत हुए।

रिपोर्ट के अनुसार, जॉइंट स्टेटमेंट के ड्राफ्ट को फाइनल रूप देने के लिए अधिकारियों के बीच शुक्रवार रात से बातचीत चलती रही और यह प्रोसेस शनिवार सुबह करीब 4 बजे तक जारी रही। लंबी बातचीत के बाद मेंबर देशों के बीच साझा डॉक्यूमेंट पर सहमति बन सकी।

ईरान, सऊदी अरब और UAE की सहमति

यह सहमति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ब्रिक्स में मिडिल ईस्ट के प्रमुख देश ईरान, सऊदी अरब और UAE शामिल हैं। रीजनल और स्ट्रैटेजिक मुद्दों पर इन देशों के बीच लंबे समय से अलग-अलग मत रहे हैं।

ऐसे माहौल में भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान बातचीत और डिप्लोमेसी के जरिए मतभेदों को ब्रिक्स की मेन प्रोसेस पर हावी नहीं होने देने की कोशिश की। साझा बयान पर सहमति को भारत की डिप्लोमैटिक भूमिका की महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

ब्रिक्स में पीस और कोऑपरेशन का मैसेज

शी जिनपिंग का मिडिल ईस्ट को लेकर बयान और ब्रिक्स मेंबर्स के बीच जॉइंट स्टेटमेंट पर सहमति, दोनों ही घटनाक्रम इस बात को रेखांकित करते हैं कि ग्रुप ग्लोबल और रीजनल मुद्दों पर साझा डायलॉग को महत्व दे रहा है।

भारत की मेजबानी में हुए इस सम्मेलन में मिडिल ईस्ट पीस, रीजनल स्टेबिलिटी और मल्टीलेटरल कोऑपरेशन जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण चर्चा का हिस्सा रहे। चीन ने भी ब्रिक्स प्लेटफॉर्म के जरिए रीजनल पीस के प्रयासों में कोऑपरेशन की इच्छा जताई है।

BRICS Summit 2026 LIVE: PM मोदी-जिनपिंग की थोड़ी देर में मीटिंग, कई अहम मुद्दों पर होगी बात

BRICS Summit 2026: नई दिल्ली घोषणापत्र में क्या-क्या? पहलगाम से गाजा तक, 10 प्वाइंट्स में समझें पूरी बात

जेल में रेप के दोषी प्रज्वल रेवन्ना की कोठरी से मिला फोन, फॉरेंसिक जांच में सामने आए दर्जनों आपत्तिजनक वीडियो

BRICS Summit 2026: नई दिल्ली घोषणा पत्र 2026 सर्वसम्मति से पारित, भारत की बड़ी सफलता

मातोश्री पहुंचीं DMK सांसद कनिमोझी! कांग्रेस से नाराजगी के कारण बदलेगा समीकरण? INDIA एलायंस में हलचल तेज