वाशिंगटन: अमेरिका द्वारा पहलगाम हमले में शामिल आतंकियों से जुड़े संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) को वैश्विक आतंकी संगठन घोषित किए जाने के बाद पाकिस्तान तिलमिला उठा है। TRF, लश्कर-ए-तैयबा का ही एक मुखौटा संगठन है, जो पाकिस्तान में सक्रिय है। अमेरिका के इस सख्त कदम के बाद अब चीन ने भी इसका समर्थन करते हुए इसे उचित करार दिया है। इस फैसले से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और हाल ही में ट्रंप के साथ लंच करने वाले पाक सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर को बड़ा झटका लगा है।
पाकिस्तान ने अमेरिका द्वारा टीआरएफ को आतंकवादी संगठन घोषित किए जाने के बाद उसका लश्कर-ए-तैयबा से कोई संबंध होने से इनकार किया है। शुक्रवार को पाकिस्तान ने दावा किया कि उसके देश में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को सफलतापूर्वक समाप्त कर दिया गया है।
साथ ही, उसने पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकी हमले को लश्कर-ए-तैयबा से जोड़ने की किसी भी कोशिश को खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया, “पाकिस्तान ने इन आतंकी संगठनों के नेटवर्क को व्यापक स्तर पर खत्म किया है। उनके सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है।”
पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने शायद ही सोचा होगा कि ट्रंप के साथ लंच के बाद अमेरिका उनके खिलाफ इतनी कड़ी कार्रवाई करेगा। लेकिन अब अमेरिकी फैसले के बाद पाकिस्तान असहज और परेशान नजर आ रहा है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि “पहलगाम आतंकी हमले की जांच अब तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है, और इसे लश्कर-ए-तैयबा जैसे निष्क्रिय या प्रतिबंधित संगठन से जोड़ना तथ्यों के खिलाफ है।”
हालांकि विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी फैसले पर सीधी प्रतिक्रिया देने से बचते हुए यह जरूर कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ अपनी जंग को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और उसने इस दिशा में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई ठोस कदम उठाए हैं।
पहलगाम आतंकी हमले के मामले में अमेरिका द्वारा उठाए गए सख्त कदम को चीन ने भी समर्थन दिया है। चीन ने जहां 22 अप्रैल को हुए हमले की कड़ी निंदा की है, वहीं 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (TRF) को लेकर अमेरिकी फैसले को भी सही ठहराया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े इस संगठन को "विदेशी आतंकवादी संगठन" घोषित किया है।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चीन हर प्रकार की आतंकवादी गतिविधियों का पुरजोर विरोध करता है और क्षेत्रीय देशों से मिलकर आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने की अपील करता है, ताकि सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।
चीन के इस रुख से साफ है कि उसने अमेरिका की कार्रवाई को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन दिया है, जो पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। पाकिस्तान, जो अक्सर ऐसे मामलों में चीन का समर्थन पाता रहा है, इस बार अंतरराष्ट्रीय मंच पर और अधिक अलग-थलग पड़ता दिखाई दे रहा है।