बांग्लादेश में ईसाई परिवारों पर कट्टरपंथियों का हमला (सोर्स-सोशल मीडिया) 
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बांग्लादेश में ईसाई परिवारों पर कट्टरपंथियों का हमला, सुरक्षा की गुहार और न्याय की मांग तेज

Bangladesh Minority Safety: बांग्लादेश में ईसाई परिवारों पर हमले तेज हो गए हैं। सतखीरा में कट्टरपंथियों ने चर्च से जुड़े परिवारों को निशाना बनाया, जिसके बाद अंतरिम सरकार से सुरक्षा की मांग की।

प्रिया सिंह

Attacks on Christians in Bangladesh: बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता के बीच अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय पर हमलों के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी हुई है। शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बनी अंतरिम सरकार के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति कमजोर होने का फायदा इस्लामिक कट्टरपंथी उठा रहे हैं।

हालिया रिपोर्टों के अनुसार, दक्षिणी बांग्लादेश के सतखीरा जिले में ईसाई परिवारों को न केवल शारीरिक हिंसा का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि उन्हें सामाजिक रूप से भी प्रताड़ित किया जा रहा है। इन पीड़ित परिवारों ने अब एकजुट होकर सरकार से सुरक्षा और न्याय की गुहार लगाई है ताकि वे अपने ही देश में सुरक्षित जीवन जी सकें।

क्रिसमस के बाद बढ़ी हिंसा

दक्षिणी बांग्लादेश के सतखीरा जिले में रहने वाले अल्पसंख्यक कैथोलिक परिवारों पर क्रिसमस के तुरंत बाद हिंसक भीड़ ने हमला कर दिया। पीड़ितों का आरोप है कि लगभग 50 लोगों ने स्थानीय हथियारों के साथ उनके घरों को निशाना बनाया और उन्हें डराया-धमकाया। इस घटना के बाद सेंट फ्रांसिस जेवियर चर्च से जुड़े परिवारों ने मानव श्रृंखला बनाकर विरोध प्रदर्शन किया और प्रशासनिक लापरवाही पर नाराजगी जाहिर की।

जमीन विवाद और कट्टरपंथ का मेल

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईसाई परिवारों पर हो रहे इन हमलों के पीछे अक्सर जमीन से जुड़े पुराने कानूनी विवादों का सहारा लिया जा रहा है। स्थानीय दबंग इन विवादों को साम्प्रदायिक रंग देकर अल्पसंख्यकों की संपत्तियों पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। धार्मिक शिक्षकों का कहना है कि वे राजनीतिक स्तर पर बातचीत कर समाधान ढूंढने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति अब भी तनावपूर्ण बनी हुई है।

बच्चों की शिक्षा पर संकट

हमलावरों ने न केवल वयस्क ईसाइयों को निशाना बनाया है, बल्कि अब बच्चों की शिक्षा में भी बाधा उत्पन्न की जा रही है। 1 जनवरी को नए सत्र की किताबें मिलने के बावजूद, कट्टरपंथी समूहों ने ईसाई बच्चों को स्कूल और कक्षाओं में जाने से रोक दिया। यह कृत्य दर्शाता है कि अल्पसंख्यकों को मुख्यधारा से काटने और उन्हें भय के साये में जीने को मजबूर करने के लिए सुनियोजित प्रयास किए जा रहे हैं।

प्रशासनिक ढुलमुल रवैया और डर

स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने घटनाओं की पुष्टि तो की है, लेकिन उनके द्वारा किए जा रहे समाधान के प्रयास अब तक बेअसर साबित हुए हैं। ढाका और अन्य शहरी क्षेत्रों में भी ईसाई संस्थानों पर हमलों की खबरें लगातार सामने आ रही हैं जिससे पूरे समुदाय में डर का माहौल है। 'यूसीए न्यूज' जैसी वैश्विक संस्थाओं ने भी अपनी रिपोर्ट में बांग्लादेशी ईसाइयों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

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