अभिषेक बनर्जी (Image- Social Media) 
पश्चिम बंगाल

पहले मतदाता सरकार चुनते थे...अब सरकार चुन रही वोटर, अभिषेक बनर्जी बोले- ज्ञानेश कुमार में हिम्मत...

West Bengal Assembly Elections: तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ने दावा किया कि बैठक के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार का रवैया 'आक्रामक' था।

अर्पित शुक्ला

West Bengal Politics: तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को कहा कि निर्वाचन आयोग पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उनकी चिंताओं का समाधान करने में नाकाम रहा है और यदि अंतिम मतदाता सूची में ‘विसंगतियां’ सामने आती हैं तो पार्टी उसे स्वीकार नहीं करेगी। बनर्जी ने संवाददाताओं से कहा, “हम इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।”

तृणमूल कांग्रेस के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने पार्टी शासित पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात की, जिसके बाद बनर्जी ने ये टिप्पणियां कीं। अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनावों में ‘वोट चोरी’ मतदाता सूची के जरिए हो रही थी, न कि ईवीएम के माध्यम से, और कहा कि अगर विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को मजबूती से उठाया होता तो महाराष्ट्र, हरियाणा और बिहार जैसे राज्यों में वे जीत हासिल कर सकते थे। बनर्जी ने कहा कि उन्होंने निर्वाचन आयोग के सामने मतदाता सूची के मसौदे से जुड़ी कई आपत्तियां रखीं, जिनमें 1.36 करोड़ मतदाताओं को तलब किए जाने का मुद्दा भी शामिल है।

ज्ञानेश कुमार का व्यवहार ‘आक्रामक’

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ने दावा किया कि बैठक के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार का व्यवहार ‘आक्रामक’ था। उन्होंने कहा, “जब हमने अपनी बात रखनी शुरू की, तो वह (सीईसी) अपना संयम खोने लगे… मैंने कहा कि आप मनोनीत हैं, मैं निर्वाचित हूं… अगर उनमें साहस है तो उन्हें फुटेज सार्वजनिक कर देनी चाहिए।”

बनर्जी ने आरोप लगाया कि आयोग उनकी शंकाओं को दूर करने में विफल रहा। जब उनसे पूछा गया कि क्या वे एसआईआर पूरा होने के बाद अंतिम मतदाता सूची को स्वीकार करेंगे, तो उन्होंने कहा, “अगर इसमें विसंगतियां होंगी, तो हम इसे क्यों स्वीकार करेंगे? हम इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।”

अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि घुसपैठ का भय फैलाकर पश्चिम बंगाल की छवि खराब करने की साजिश की जा रही है। उन्होंने निर्वाचन आयोग को चुनौती दी कि वह उन 58 लाख मतदाताओं में से बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं की सूची पेश करे, जिनके नाम मसौदा मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची का दुरुपयोग हो रहा है और सभी समान विचारधारा वाली पार्टियों से इस पर ध्यान देने की अपील की।

‘वोट चोरी’ मतदाता सूची में हो रही

तृणमूल नेता ने कहा, “मैं सभी से अनुरोध करता हूं, ‘वोट चोरी’ मतदाता सूची में हो रही है, ईवीएम के जरिए नहीं। आपको नहीं पता कि वे लोगों को मताधिकार से वंचित करने के लिए कौन सा एल्गोरिदम या सॉफ्टवेयर इस्तेमाल कर रहे हैं। वे मतदाता सूची को हथियार की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं।” उन्होंने कहा, “पहले मतदाता सरकार चुनते थे; अब सरकार मतदाताओं को चुन रही है।” तृणमूल नेता ने कहा, “ये वही गलतियां हैं जो कांग्रेस ने पहले की थीं, जिन्हें आम आदमी पार्टी ने भी उजागर नहीं किया, और यहां तक कि बिहार में राजद भी इन्हें उठाने में असफल रही, जिसके चलते चुनाव में भाजपा की सफलता 88 प्रतिशत रही।”

ईवीएम के जरिए वोटों की चोरी

उन्होंने कहा, “भाजपा ने महाराष्ट्र, दिल्ली और बिहार में 88 प्रतिशत के ‘स्ट्राइक रेट’ से जीत दर्ज की। क्या यह सिर्फ संयोग है? यह वोटों की चोरी है। ईवीएम के जरिए वोटों की चोरी नहीं होती। अन्य राज्यों में कोई भी राजनीतिक दल इस सच्चाई को सामने नहीं ला पाया।”

इस बीच, निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को यह स्पष्ट कर दिया गया है कि जमीनी स्तर के राजनीतिक प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं द्वारा चुनावी कार्य में लगे किसी भी कर्मचारी को धमकाना सहन नहीं किया जाएगा और पश्चिम बंगाल सरकार को प्रत्येक बीएलओ को बढ़ा हुआ मानदेय तुरंत जारी करना चाहिए। अधिकारियों ने यह भी कहा कि कानून को हाथ में लेने की कोशिश करने वाले किसी भी उपद्रवी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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