एयरपोर्ट सोर्स-(सोशल मीडिया)
पश्चिम बंगाल

बंगालवासियों को उड़ान की सौगात! राज्य में 4 नए एयरपोर्ट की तैयारी, एमओयू पर हुआ साइन

New Airports In Bengal: पश्चिम बंगाल में नए एयरपोर्ट बनने जा रहे है। पुरुलिया, बालुरघाट, हासीमारा और कलाईकुंडा में एयर पोर्ट की सुविधा होने से आम नागरिकों को हवाई यात्रा में सहुलियत मिलेगी।

आशीष शुक्ला

Plans for 4 New Airports In Bengal: पश्चिम बंगाल में नए एयरपोर्ट बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। आज, सोमवार को नबन्ना कॉन्फ्रेंस हॉल में पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस समझौते का मकसद नए एयरपोर्ट के निर्माण में मदद करना है।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह और अन्य लोग मौजूद रहेंगे। जिन चार एयरपोर्ट पर चर्चा हो रही है, उनमें छर्रा (पुरुलिया) और बालुरघाट के एयरपोर्ट सबसे अहम हैं। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पहले ही बालुरघाट एयरपोर्ट का निरीक्षण कर चुके हैं। राज्य में 4 नए एयरपोर्ट क्रमश: पुरुलिया, बालुरघाट, हासीमारा और कलाईकुंडा के रूप में राज्य के नागरिकों को सौगात मिली है।

बालुरघाट एयरपोर्ट

इसका रनवे मूल रूप से दूसरे विश्व युद्ध के दौरान बनाया गया था। बाद में वहां से कमर्शियल उड़ानें संचालित हुईं और 1980 के दशक में वायुदूत ने भी बालुरघाट से अपनी सेवाएं दी थीं। तब से यह एयरपोर्ट बंद पड़ा है। इसमें लगभग 1,500 मीटर लंबा रनवे है, जो ATR-72 विमानों को संभालने में सक्षम है, और यहां एक टर्मिनल बिल्डिंग भी है।

केंद्र सरकार करेगी एयरपोर्ट का संचालन

पिछली सरकार के कार्यकाल में यह तय किया गया था कि राज्य सरकार ही एयरपोर्ट का संचालन करेगी। 2018 में इसके इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने पर लगभग ₹12 करोड़ खर्च किए गए थे; हालांकि, एयरपोर्ट कभी चालू नहीं हो पाया। राज्य के पास मौजूद लगभग 132 एकड़ में फैली यह सुविधा अब केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी। मुख्यमंत्री ने हाल ही में इस जगह का निरीक्षण किया और वहां बड़े विमानों के संचालन की इच्छा जताई।

प्रयास लेकिन रहा असफल

हालांकि लेफ्ट और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकाल में वहां एक पूर्ण हवाई अड्डा बनाने की कोशिशें की गई थीं, लेकिन यह प्रोजेक्ट कभी पूरा नहीं हो पाया। प्रशासन का मानना ​​है कि सर्वे होने के बावजूद केंद्र सरकार के साथ तालमेल की कमी इसका मुख्य कारण थी। लेकिन अब राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर बीजेपी की "डबल-इंजन" सरकार है; इसलिए, इस प्रोजेक्ट को तेज़ी से आगे बढ़ाने में ज़्यादा समय नहीं लगा।

CEC को तत्काल राहत, ECI को नोटिस…Form 6 को लेकर सुप्रीम कोर्ट और ECI की बात में क्या अंतर? समझें पूरा विवाद

ज्ञानेश कुमार पर राहुल का प्रहार! बोले BJP को लाभ पहुंचाने के लिए पद का किया गलत प्रयोग

क्या होती है फीलिंग ऑफ फ्लाइट्स? कैप्टन स्मित मच्छार पर पूर्व सहकर्मी टीना गोस्वामी का बड़ा खुलासा

दिग्विजय सिंह ने हमेशा हिंदू धर्म को बदनाम करने की कोशिश की, भाजपा विधायक राम कदम का बड़ा हमला

विदेश नीति से यूसीसी तक: शायना NC ने मणिशंकर अय्यर, राहुल गांधी और दिग्विजय सिंह को घेरा