अमित शाह, ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी।  
पश्चिम बंगाल

अबकी बार अमित शाह और अभिषेक बनर्जी में लड़ाई... पश्चिम बंगाल चुनाव में दूसरे नेता कहां?

Amit Shah News : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की सियासी बिसात बिछी है। चुनाव अमित शाह बनाम अभिषेक बनर्जी होता जा रहा। दूसरे नेता कहां हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और खड़गे चुनाव से गायब हैं।

रंजन कुमार

West Bengal Assembly Elections 2026 News : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के साथ राज्य का सियासी पारा चढ़ गया है। इस बार का मुकाबला दिलचस्प मोड़ पर है, क्योंकि मैदान में सीधी टक्कर अमित शाह बनाम अभिषेक बनर्जी के रूप में सिमटती दिख रही है। एक तरफ भाजपा के चाणक्य अमित शाह ने कमान संभाल ली है तो दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सेनापति अभिषेक बनर्जी जमीन पर आक्रामक मोर्चाबंदी कर रहे हैं।

गृहमंत्री अमित शाह बीते दो महीनों में कई बार बंगाल का दौरा कर चुके हैं। सिलीगुड़ी, बैरकपुर और बागडोगरा की रैलियों में उमड़ी भीड़ भाजपा के मिशन 2026 के प्रति उत्साह दिखा रही है। शाह न केवल जनसभाएं कर रहे, बल्कि सांगठनिक स्तर पर दिलीप घोष और सौमिक भट्टाचार्य जैसे दिग्गजों के बीच तालमेल बिठाकर पार्टी को एकजुट करने में जुटे हैं। भाजपा ने 26 से जीते भाजपा का नारा देकर अपना लक्ष्य साफ कर दिया है।

अभिषेक बनर्जी का बांग्ला कार्ड

ममता बनर्जी ने रणनीतिक रूप से अभिषेक बनर्जी को आगे कर दिया है। अभिषेक अपनी पदयात्राओं और जोतेई कोरो हमला, आबार जितबे बांग्ला (जितना भी हमला करो, बंगाल फिर जीतेगा) के नारे के साथ युवाओं और मतदाताओं को साध रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस को प्रचंड बहुमत (213 सीटें) और अल्पसंख्यक वोट बैंक पर भरोसा है, जहां ओवैसी जैसे चेहरे अब तक बेअसर रहे हैं।

कांग्रेस और लेफ्ट का असमंजस

हैरानी की बात है कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व यानी राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे इस चुनावी रण से दूर नजर आ रहे। राहुल गांधी आखिरी बार फरवरी 2025 में बंगाल गए थे। अधीर रंजन चौधरी के हाशिए पर जाने के बाद बंगाल कांग्रेस फिलहाल ममता बनर्जी के सामने कमजोर दिख रही। वामदल (CPIM) और हुमायूं कबीर की JUP के बीच गठबंधन की सुगबुगाहट तो है, लेकिन शून्य सीटों वाले लेफ्ट के लिए यह रास्ता कठिन है।

दो ध्रुवीय मुकाबला

आंकड़े गवाह हैं कि बंगाल में मुकाबला दो ध्रुवीय हो चुका है। एक ओर भाजपा 70 से अधिक विधायकों के साथ सत्ता छीनने की कोशिश में है। दूसरी ओर टीएमसी अपनी जमीन बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। कांग्रेस और लेफ्ट की चुप्पी ने इस चुनाव को पूरी तरह से शाह बनाम अभिषेक की जंग बना दिया है।

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