Former Justice Indrajit Wants To Step Down From SIR Duty: देश के 16 राज्यों और 3 केन्द्रशासित प्रदेश में एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है जिसका पूरा विपक्ष विरोध कर रहा है। SIR के विरोध के साथ-साथ विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहा है। इसी बीच पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के SIR को लेकर चल रही प्रक्रिया के बीच कलकत्ता उच्च न्यायालय के रिटायर्ड जज इंद्रजीत चटर्जी ने SIR अपीलीय ट्रिब्यूनल की जिम्मेदारी से हटने की इच्छा जताई है।
उन्होंने इस संबंध में कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र लिखा है। गौरतलब है कि जस्टिस चटर्जी मुर्शिदाबाद जिले से जुड़ी SIR अपीलों की सुनवाई करने वाले अधिकरण की अध्यक्षता कर रहे हैं। उन्होंने पत्र में कहा है कि वह 2 नवंबर से इस जिम्मेदारी से हटना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने खराब सड़कों और लंबी दूरी का हवाला दिया है।
रिपोर्टों के अनुसार, जस्टिस इंद्रजीत चटर्जी का घर साल्ट लेक में है, जबकि ट्रिब्यूनल का कार्यालय जोका में पड़ता है। दोनों के बीच आने-जाने में उन्हें रोज करीब 70 किलोमीटर का सफर करना पड़ता है। इस यात्रा में करीब 4 घंटे तक का समय लग जाता है। उनका कहना है कि भारी ट्रैफिक और खराब सड़कों के कारण रोजाना इतनी लंबी यात्रा करना उनके लिए मुश्किल हो रहा है।
जस्टिस चटर्जी ने अपने पत्र में पूरी तरह जिम्मेदारी छोड़ने से पहले चुनाव आयोग के सामने विकल्प भी सुझाए हैं। उन्होंने कहा है कि अगर न्यायाधिकरण कार्यालय उनके साल्ट लेक स्थित घर के करीब बनाया जाए या उन्हें घर से ही मामलों की सुनवाई करने की अनुमति दी जाए, तो वह अपनी जिम्मेदारी जारी रख सकते हैं।
करोड़ों की आबादी वाले मुर्शिदाबाद में एसआईआर से जुड़ी अपीलों का भार भी काफी बड़ा है। अलग-अलग रिपोर्टों में जस्टिस चटर्जी के ट्रिब्यूनल के सामने करीब 5.25 लाख से 7.47 लाख अपीलें लंबित होने की बात सामने आई है। उन्होंने अब तक 425 मामलों का निपटारा किया है। इनमें 350 लोगों के नाम मतदाता सूची में बहाल किए गए, जबकि 75 मामलों में नाम हटाए गए।
SIR से जुड़ी अपीलों की सुनवाई के लिए पश्चिम बंगाल में 19 अपीलीय ट्रिब्यूनल बनाए गए थे। इनका गठन मतदाता सूची में नाम शामिल करने या हटाने से जुड़े विवादों की सुनवाई के लिए किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस चटर्जी ने पत्र में कहा है कि अगर उनके विकल्प संबंधी अनुरोध पर समाधान नहीं होता है तो उनका इस्तीफा 2 नवंबर से प्रभावी हो जाएगा। ऐसे में उनके ट्रिब्यूनल के सामने लंबित SIR अपीलों के निपटारे की प्रक्रिया पर इसका असर पड़ सकता है।