Holi Viral Video: ब्रज की होली सिर्फ रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि गहरी आस्था और विश्वास की मिसाल भी है। मंगलवार तड़के करीब 4 बजे कोसीकलां के फालैन गांव में जब होलिका दहन की लपटें आसमान छू रही थीं, तब संजू पंडा ने धधकती आग के बीच से दौड़ लगाकर सभी को हैरान कर दिया। आश्चर्य की बात यह रही कि भीषण आग के बावजूद उनके शरीर पर झुलसने का कोई निशान नहीं दिखा। गांव फालैन की यह परंपरा करीब 5200 वर्ष पुरानी मानी जाती है।
संजू पंडा पिछले 45 दिनों से प्रह्लाद मंदिर में कठोर तपस्या कर रहे थे। उन्होंने जमीन पर सोते हुए और केवल फलाहार ग्रहण कर ब्रह्मचर्य का पालन किया। परंपरा के अनुसार, होलिका दहन से पहले उन्होंने मंदिर की ज्योति पर हाथ रखकर देवी संकेत की प्रतीक्षा की। जैसे ही उन्हें ज्योति में शीतलता का अनुभव हुआ, उन्होंने आग में प्रवेश का संकेत दिया।
आग से बाहर आने के बाद संजू पंडा ने कहा, “यह मेरा चमत्कार नहीं, बल्कि प्रभु प्रह्लाद की कृपा है। जब मैं अग्नि में प्रवेश करता हूं तो बाल रूप में प्रह्लाद जी मेरे आगे चलते हैं और मुझे आग का ताप महसूस नहीं होता।” उनकी बहन रजनी ने जलती होली पर कलश से अर्घ्य अर्पित किया। इसके बाद होलिका दहन पर संजू ने प्रह्लाद कुंड में स्नान कर सीधे अग्नि की लपटों में प्रवेश किया।
इस अनोखे दृश्य को देखने के लिए जर्मनी, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों से विदेशी पर्यटक भी पहुंचे और इसे देखकर अचंभित रह गए। वैज्ञानिकों के लिए यह घटना आज भी एक रहस्य बनी हुई है, जबकि ग्रामीण इसे भगवान नरसिंह का आशीर्वाद मानते हैं, जिसे प्रह्लाद के वंशज पीढ़ी दर पीढ़ी निभाते आ रहे हैं।
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मान्यता है कि इसी स्थान पर भक्त प्रह्लाद को जलाने के प्रयास विफल हुए थे। संजू पंडा के परिवार की कई पीढ़ियां इस परंपरा का निर्वहन करती आई हैं। इससे पहले उनके पिता सुशील पंडा आठ बार और बड़े भाई मोनू पंडा चार बार जलती होली से सुरक्षित निकल चुके हैं।