निहंग सिखों के ऐलान के बाद उत्तराखंड के सीमा पर पुलिस बल (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया) 
उत्तराखण्ड

उत्तराखंड में फिर बड़े बवाल की आहट! पंजाब से कूच कर गया सैकड़ों निहंग सिखों का जत्था, हाई अलर्ट पर पुलिस

Karnaprayag Nihang Controversy: उत्तराखंड में निहंग सिख विवाद गहराता जा रहा है। पंजाब से सैकड़ों निहंगों का जत्था कर्णप्रयाग के लिए रवाना हो गया है। पुलिस बल हाई अलर्ट पर है।

अमन मौर्या

Uttarakhand Nihang Sikh Dispute: उत्तराखंड में निहंग सिख विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक बार फिर से उत्तराखंड में बवाल देखने को मिल सकता है। जानकारी के मुताबिक, सैकड़ों की संख्या में निहंग सिखों का एक जत्था पंजाब से उत्तराखंड के लिए रवाना हो चुके हैं। निहंगों ने 3 बजे तक कर्णप्रयाग पहुंचने का ऐलान किया था। इसके लिए पंजाब के कई जिलों से भारी संख्या में श्रद्धालु मोहाली में एकत्रित हो गए हैं। निहंगों के आज कर्णप्रयाग पहुंचने के ऐलान के बाद राज्य में हलचल तेज है। उत्तराखंड के सभी सीमावर्ती जिलों पर भारी पुलिस बल तैनात है। उत्तराखंड पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने कुल्हाल बॉर्डर पर डटे हैं। यहां से गुजरने वाले सभी वाहनों की पुलिस तलाशी ले रही है।

 सीमा पर निगरानी तेज

निहंग सिखों ने 25 जून को कर्णप्रयाग आने के ऐलान का किया था। ऐलान के बाद पंजाब के कई हिस्सों से भारी संख्या में निहंग मोहाली में जुटे हैं। वहीं, दूसरी तरफ निहंग सिखों के कर्णप्रयाग आने की सूचना मिलने पर राज्य पुलिस प्रदेश के सभी सीमावर्ती जिलों पर अलर्ट मोड में है। सीमा पर भारी संख्या में तैनात पुलिस बल सभी वाहनों की सघन जांच कर रही है।

स्थानीय लोगों में नाराजगी

रुद्रप्रयाग में नगरासू गुरुद्वारे से भले ही निहंग सिख वापस चले गए हों, लेकिन यह विवाद अभी थमा नहीं है। रुद्रप्रयाग की घटना के बाद से यहां स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। नगरासू वाली घटना में शामिल निहंग सिखों के खिलाफ लोगों ने कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय लोगों द्वारा धरने के दौरान कहा गया कि सरकार निहंग सिखों के आगे झुक गई है।

क्या है पूरा मामला?

बता दें, उत्तराखंड के कर्णप्रयाग जिले में स्थानीय लोगों के साथ निहंग सिखों का झगड़ा हो गया। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार निहंग सिखों को हिरासत में लेकर जेल में डाल दिया था। इस कार्रवाई से नाराज निहंग सिखों ने रुद्रप्रयाग के ही नगरासु गुरुद्वारे पर कब्जा करके कई लोगों को बंधक बना लिया। करीब तीन दिन तक गुरुद्वारे पर निहंगों का कब्जा रहा। हालांकि, प्रशासन की बातचीत के बाद निहंग सिख कब्जा छोड़कर वापस अपने घर गए।

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