Dehradun CBI Court Verdict Acharya Balkrishna: पतंजलि योगपीठ के महामंत्री और बाबा रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण को पासपोर्ट और फर्जी दस्तावेज मामले में कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। देहरादून की सीबीआई अदालत ने मामले पर आज फैसला सुनाया है। 15 साल पुराने मामले में अदालत ने आचार्य बालकृष्ण को बरी कर दिया है। आचार्य बालकृष्ण पर फर्जी शैक्षणिक कागजातों के आधार पर पासपोर्ट हासिल करने का आरोप है।
सीबीआई के मुताबिक, बाबा रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण ने भारतीयत पासपोर्ट बनवाने के लिए उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित कार्यालय में खुर्जा के एक संस्कृत महाविद्यालय से जुड़ा कथित फर्जी शैक्षणिक कागजात प्रस्तुत किया था। इस मामले में बालकृष्ण के खिलाफ पासपोर्ट अधिनियम और आपराधिक धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की गई थी। अब लगभग 15 साल पुराने इस मामले में कोर्ट ने आज फैसला सुनाते हुए राहत दी है।
बता दें, जानकारी सामने आने के बाद उस समय यह मामला खूब चर्चा में रहा। वर्ष 2016 में नेपाल सरकार के साथ सीबीआई ने मामले में पत्राचार के माध्यम से संपर्क भी किया था। इसके बाद एजेंसी ने बालकृष्ण के खिलाफ पासपोर्ट अधिनियम के तहत और धोखाधड़ी तथा जालसाजी में चार्जशीट दाखिल की थी। इसके अलावा शिक्षण संस्थान के पूर्व प्रधानाचार्य नरेश चंद द्विवेदी के खिलाफ भी सीबीआई ने जालसाजी और धोखाधड़ी का आरोप-पत्र दाखिल किया था। उसके बाद से ही यह मुकदमा स्पेशल मजिस्ट्रेट सीबीआई की कोर्ट में विचाराधीन था।
बता दें कि बाबा रामदेव के सहयोगी और पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी कि उनके पास नेपाल की नागरिकता है। भारतीय पासपोर्ट उन्होंने फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के आधार पर बनवाया है। शिकायत के बाद सीबीआई ने साल 2011 में बालकृष्ण के खिलाफ जांच करके मुकदमा दर्ज कर लिया था। सीबीआई की जांच में यह पाया गया था कि खुर्जा के एक शिक्षण संस्थान से उन्होंने फर्जी डिग्री भी हासिल कर ली है।