संस्कृति संसद-2026 में हुआ जेन-जी कॉन्क्लेव (सोर्स- नवभारत लाइव)
वाराणसी

आपकी सोच को कौन कर रहा कंट्रोल? सोशल मीडिया के नैरेटिव और एल्गोरिदम पर जेन-जी को चेताया

Social Media Narrative: वाराणसी में संस्कृति संसद-2026 के तहत आयोजित जेन-जी कॉन्क्लेव में युवाओं को सोशल मीडिया के प्रभाव, नैरेटिव की राजनीति और मीडिया लिटरेसी के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया गया।

धर्मेंद्र कुमार चौबे, रवनेश विश्‍वकर्मा

Highlights:

  • सोशल मीडिया पर हर सूचना सच नहीं

  • नारेबाजी करने से पहले उसका उद्देश्य समझें

  • सोशल मीडिया एल्गोरिदम एक जैसी सामग्री बार-बार दिखाते हैं

Varanasi Culture Parliament: वाराणसी में संस्कृति संसद-2026 के तहत आयोजित जेन-जी कॉन्क्लेव में युवाओं को सोशल मीडिया के प्रभाव, नैरेटिव की राजनीति और मीडिया लिटरेसी के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि सोशल मीडिया पर आने वाली हर सूचना को बिना जांचे-परखे स्वीकार करना युवाओं के लिए नुकसानदायक हो सकता है। युवाओं को अपनी ऊर्जा और प्रतिभा का इस्तेमाल राष्ट्र निर्माण में करना चाहिए।

'नैरेटिव और मीडिया लिटरेसी' विषय पर आयोजित चर्चा में पश्चिम बंगाल के भाजपा युवा विधायक संतु पान, टाटा पावर के सोशल इम्पैक्ट ग्रुप के चीफ एवं चीफ एथिक्स काउंसलर भरत छाबड़ा और आईआईटी बीएचयू के पूर्व छात्र बृजेश मानव ने अपने विचार रखे।

युवाओं की ऊर्जा राष्ट्र निर्माण में लगे, न कि विखंडन में

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि नीरजा माधव ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी वाले देशों में शामिल है। ऐसे में युवाओं के पास राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर है। उनकी ऊर्जा और प्रतिभा का इस्तेमाल देश को मजबूत बनाने में होना चाहिए, न कि उसके विखंडन में।

उन्होंने कहा कि आज सोशल मीडिया पर जेन-जी के नाम पर अलग-अलग समूह बन रहे हैं। कई बार युवा नारेबाजी तो करते हैं, लेकिन उन्हें यह भी स्पष्ट नहीं होता कि वे किस उद्देश्य से ऐसा कर रहे हैं।

नीरजा माधव ने कहा कि कुछ देश विरोधी शक्तियां युवाओं की भावनाओं और ऊर्जा का इस्तेमाल अपने राजनीतिक हितों के लिए करती हैं। युवाओं को भटकाकर सत्ता हासिल करने की कोशिश की जाती है। ऐसे में उन्हें किसी के बहकावे में आने के बजाय अपनी समझ और विवेक से फैसला लेना चाहिए।

उन्होंने मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए। कहा कि मीडिया ने भारतीय युवाओं को काफी नुकसान पहुंचाया है। युवाओं का मूल्यांकन उनके समूह, विचारधारा या नारेबाजी के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी प्रतिभा, मेधा और काम करने की क्षमता के आधार पर होना चाहिए।

सोशल मीडिया की हर सूचना को दो कसौटियों पर परखें

टाटा पावर के सोशल इम्पैक्ट ग्रुप के चीफ भरत छाबड़ा ने कहा कि सोशल मीडिया पर उपलब्ध सूचनाएं लगातार हमारी सोच और विचारों को प्रभावित करती हैं। अधूरी जानकारी, चुनिंदा तथ्यों और भ्रामक आंकड़ों के जरिए किसी भी मुद्दे पर लोगों की राय बनाई जा सकती है। इसलिए युवाओं को सोशल मीडिया पर मिलने वाली हर सूचना के प्रति सतर्क रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसी भी सूचना को स्वीकार करने से पहले उसे दो कसौटियों पर परखना चाहिए। पहली, क्या वह सूचना सकारात्मक है और दूसरी, क्या वह समाज और राष्ट्र के हित में है?

एल्गोरिदम के कारण एक ही तरह की सामग्री देखते हैं यूजर

भरत छाबड़ा ने सोशल मीडिया के एल्गोरिदम की कार्यप्रणाली भी समझाई। उन्होंने कहा कि यूजर जिस तरह की सामग्री पर ज्यादा समय बिताता है, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म उसी तरह की सामग्री बार-बार दिखाने लगते हैं। इससे व्यक्ति धीरे-धीरे एक ही तरह के विचारों और सूचनाओं के दायरे में सिमट सकता है।

उन्होंने कहा कि युवा अनजाने में घंटों रील देखने में बिता देते हैं। इसका असर उनकी एकाग्रता, पढ़ने की आदत और सोचने-समझने की क्षमता पर पड़ सकता है।

कार्यक्रम में शिवान पाल, प्रतीक शर्मा, युवराज पोखल और अंजलि सारस्वत ने भी अपने विचार रखे। मंच पर राजन जी और अंगद जी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन शेफाली कश्यप ने किया।

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