आलोक उमाकृष्ण
वीडियो के छोटे हिस्से को काटकर या संदर्भ से अलग करके भ्रामक दावा किया जा सकता है। पूरा वीडियो और घटना का संदर्भ तलाशें।वायरल खबर
सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने वाली हर खबर सच नहीं होती। किसी भी मैसेज पर भरोसा करने से पहले उसकी पुष्टि जरूर करें।
सनसनीखेज या डर पैदा करने वाली हेडलाइन देखकर तुरंत यकीन न करें। पूरी खबर पढ़ें और देखें कि उसमें ठोस तथ्य दिए गए हैं या नहीं।
खबर किसने प्रकाशित की है, यह जरूर जांचें। संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट और भरोसेमंद समाचार संस्थानों से जानकारी मिलाएं।
कई बार पुरानी खबर या वीडियो को नई घटना बताकर शेयर किया जाता है। पोस्ट की तारीख के साथ घटना की असली तारीख भी जांचें।
तस्वीर की सच्चाई जानने के लिए Google Lens जैसे टूल इस्तेमाल करें। इससे पता चल सकता है कि फोटो पहले कहां और कब प्रकाशित हुई थी।
वीडियो के छोटे हिस्से को काटकर या संदर्भ से अलग करके भ्रामक दावा किया जा सकता है। पूरा वीडियो और घटना का संदर्भ तलाशें।
AI से बनाई गई तस्वीरें और बदली हुई आवाजें असली लग सकती हैं। सिर्फ देखकर फैसला न करें; दूसरे विश्वसनीय स्रोतों से भी पुष्टि करें।
संदिग्ध दावों को Alt News, BOOM और PIB Fact Check जैसे प्लेटफॉर्म पर खोजें। ध्यान रखें कि हर वायरल दावे पर फैक्ट चेक उपलब्ध हो, यह जरूरी नहीं।
खबर की पुष्टि नहीं हुई है तो उसे आगे न भेजें। खासकर सांप्रदायिक तनाव, हिंसा, चुनाव या आपात स्थिति से जुड़े संदेशों में सावधानी बरतें।
सही जानकारी मिलने पर ही खबर शेयर करें। अगर कोई पोस्ट भ्रामक निकले, तो उसके सुधार या खंडन को भी दूसरों तक पहुंचाएं।
सरकारी दावों के लिए
केंद्र सरकार की योजनाओं, मंत्रालयों, सरकारी घोषणाओं और नीतियों से जुड़ी संदिग्ध खबरों की जांच के लिए।