मंडलायुक्त  (सोर्स- फोटो नवभारत)
वाराणसी

Varanasi: गांधी-शास्त्री जयंती पर श्रद्धांजलि, मंडलायुक्त और DM सत्येंद्र ने ईमानदारी और सादगी का दिया संदेश

Gandhi Shastri Jayanti 2026: गांधी-शास्त्री जयंती पर मंडलायुक्त-जिलाधिकारी ने महात्मा गांधी-लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि दी। सत्य, अहिंसा, और राष्ट्रसेवा के आदर्शों को अपनाने का संदेश दिया।

धर्मेंद्र कुमार चौबे, स्निग्धा श्रीवास्तव

Gandhi Shastri Jayanti 2026 Varanasi: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर आयुक्त सभागार में मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने दोनों महान् विभूतियों को अपनी श्रद्धासुमन अर्पित की। उन्होंने इस अवसर पर मौजूद अधिकारियों/कर्मचारियों को संबोधित करते हुए महात्मा गांधी एवं माटी के लाल पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के जीवन चरित्र को आत्मसात् करने पर जोर देते हुए कहा कि यह महान् विभूति देश और समाज के लिए हर कालखंड में प्रासंगिक रहेंगे। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जीवन सादगी, सत्य, अहिंसा, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा का प्रेरणास्रोत है। दोनों महापुरुषों ने अपने आचरण और विचारों से देश एवं समाज को नई दिशा देने का कार्य किया।

आत्मविश्वास एवं स्वाभिमान की भावना जागृत की

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन को जन-जन से जोड़ा और देशवासियों में आत्मविश्वास एवं स्वाभिमान की भावना जागृत की। वहीं, लाल बहादुर शास्त्री ने सादगी, विनम्रता और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ देश का नेतृत्व किया। उनका जीवन आमजन के प्रति संवेदनशीलता और राष्ट्र के प्रति समर्पण का अनुपम उदाहरण है।

मंडलायुक्त ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे दोनों महान विभूतियों के जीवन चरित्र एवं आदर्शों को आत्मसात करते हुए अपने दायित्वों का पूरी ईमानदारी, निष्ठा और पारदर्शिता के साथ निर्वहन करें। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के विचार किसी एक समय या पीढ़ी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हर कालखंड में देश और समाज के लिए प्रासंगिक रहेंगे।

उन्होंने कहा कि आज के दौर में इन महापुरुषों के विचारों और आदर्शों को अपने जीवन एवं कार्यशैली में अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत में गांधी जी के प्रिय भजन रघुपति राघव राजाराम की धुन को सभी ने एक स्वर में गाया।

कार्यक्रम में अपर आयुक्त (प्रशासन) आलोक कुमार वर्मा, अपर आयुक्त (न्यायिक) सहित मंडलायुक्त कार्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी प्रमुख रूप से मौजूद रहे। महात्मा गांधी ने श्रम की गरिमा को स्थापित किया और छुआछूत जैसी सामाजिक कुरीतियों पर कड़ा प्रहार किया-जिलाधिकारी

एक स्वर में गाया रघुपति राघव राजाराम

ज़िलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित कार्यक्रम में उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण व पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि दी और अपने विचार भी व्यक्त किए। कार्यक्रम की शुरुआत में गांधी के प्रिय भजन रघुपति राघव राजाराम की धुन को सभी ने एक स्वर में गाया। कलाकार उदयनाथ ने गांधी और शास्त्री पर लोकगीत प्रस्तुत किया।

जिलाधिकारी ने उपस्थित सभी को गांधी और शास्त्री जयंती पर हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई दी।उन्होंने गाँधी को याद करते हुए उनके स्वच्छता, शिक्षा और आंदोलन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के अधिवेशनों में जब स्वयंसेवक शौचालय साफ करने से कतराते थे, तो गांधी जी खुद झाड़ू उठा लेते थे। वे अपना शौचालय खुद साफ़ करते थे। ऐसा करके उन्होंने श्रम की गरिमा को स्थापित किया और छुआछूत जैसी सामाजिक कुरीतियों पर कड़ा प्रहार किया। गांधी को जो सही लगा उसे उन्होंने अपने आत्मबल के साथ दृढ़ संकल्पित होकर किया।

व्यक्तिगत स्तर से ही शुरू होते है बड़े परिवर्तन

दोनों महापुरुषों से हमे यही प्रेरणा मिलती है कि हम सभी के लिए जीवन में सामान्य से असाधारण और असामान्य बनने का पूरा अवसर है। शास्त्री के जीवन से सादगी से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। उन्होंने शास्त्री के पीएम रहते हुए रूस दौरे पर ठंड के लिए रूसी पीएम द्वारा दिए गए ओवरकोट को अपने स्टाफ को देने का वाक़या सुनाया। कहा कि शास्त्री जी ईमानदारी, सादगी और स्वाभिमान का एक बेमिसाल प्रतीक है। उन्होंने शास्त्री जी की फिएट गाड़ी का किस्सा भी सुनाया।

कहा कि हमारा मानना है कि हम पब्लिक लाइफ में कोई लोकापवाद के कार्य ना करें, यह शास्त्री का विचार था। लाल बहादुर शास्त्री भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे, जो अपनी सादगी, ईमानदारी और दृढ़ नेतृत्व के लिए जाने जाते थे। वह महात्मा गांधी से प्रभावित एक स्वतंत्रता सेनानी थे। दोनों महापुरुषों ने पब्लिक लाइफ के ऐसे उच्च मानक तय किए थे। हम सभी को उनसे सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि बड़े परिवर्तन व्यक्तिगत स्तर से ही शुरू होते हैं।

एडीएम एफआर ने कहा कि गांधी से पहले भी भारत में आंदोलन चल रहे थे लेकिन गांधी ने देश भर में घूमकर समझने का प्रयास किया और पाया कुछ लोगों के द्वारा यह आंदोलन किया जा रहा है। उन्होंने जन आंदोलन बनाने के लिए किसानों, मज़दूरों और महिलाओं को जोड़ने का काम किया।

गाँधी ने उस समय में उन्होंने स्वच्छता, अस्पृश्यता उन्मूलन, ग्राम पंचायतों के गठन और मूलभूत शिक्षा के बारे में बात की थी। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को भी याद किया। एडीएम एफआर ने गांधी द्वारा गाँवों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके ट्रस्टीशिप के सिद्धांत तथा लाल बहादुर शास्त्री के जीवन पर अपने विचार साझा किए। अन्य अधिकारियों व स्वतंत्रता सेनानी के परिवार के लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए।

इस मौके पर एडीएम एफआर सदानंद गुप्ता, एडीएम सिटी पंकज कुमार, एडीएम सीएस अमित भारती, एडीएम प्रोटोकॉल विनय सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट, सीआरओ अजीत परेश, एसडीएम अंजलि सिंह व देवेन्द्र कुमार सहित अन्य अधिकारी व कलेक्ट्रेट के कर्मचारी मौजूद रहे।

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