Highlights
वाराणसी में 24 दुर्लभ कछुओं के साथ अमेठी का युवक गिरफ्तार
कुंभ एक्सप्रेस के जनरल कोच में बैठे तस्कर
बैग और बोरियों में छिपाकर पश्चिम बंगाल ले जाए जा रहे थे कछुए
वन विभाग ने बताई करीब 12 लाख रुपये कीमत
Varanasi Cantt Railway Station News: रेलवे स्टेशन पर अवैध तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान जीआरपी, आरपीएफ, पीएसी और सीआईबी की संयुक्त टीम ने वन्यजीव तस्करी के एक मामले का खुलासा किया है। वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन पर सोमवार, 12 अक्टूबर को कुंभ एक्सप्रेस के जनरल कोच से 24 जीवित इंडियन सॉफ्टशेल टर्टल (भारतीय सॉफ्टशेल कछुए) बरामद किए गए। मामले में अमेठी निवासी करीब 20 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया गया है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बरामद कछुओं की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 12 लाख रुपये है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी कछुओं को उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों के तालाबों से पकड़कर बिक्री के उद्देश्य से पश्चिम बंगाल ले जा रहा था। तस्करी में इस्तेमाल किए जा रहे दो पिट्ठू बैग, एक जूट की बोरी और एक कपड़े के झोले से कछुओं को बरामद किया गया। मामले में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत आगे की विधिक कार्रवाई के लिए आरोपी और बरामद कछुओं को वन विभाग की टीम के सुपुर्द कर दिया गया।
जीआरपी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, रेलवे स्टेशन, प्लेटफॉर्म और सर्कुलेटिंग एरिया में चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने, वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी तथा अवैध तस्करी रोकने के लिए अभियान चलाया जा रहा था। पुलिस महानिदेशक रेलवे प्रकाश डी, रेलवे जोन प्रयागराज के पुलिस महानिरीक्षक एन. कोलांची और रेलवे पुलिस अधीक्षक प्रयागराज प्रशांत वर्मा के निर्देशन में अभियान की निगरानी की जा रही थी। वाराणसी के पुलिस उपाधीक्षक रेलवे कुंवर प्रभात सिंह के पर्यवेक्षण में जीआरपी, आरपीएफ, पीएसी और सीआईबी की संयुक्त टीम स्टेशन पर चेकिंग और गश्त कर रही थी।
इसी दौरान टीम को मुखबिर से सूचना मिली कि ट्रेन संख्या 13038 कुंभ एक्सप्रेस के जनरल कोच में कछुओं की तस्करी की जा रही है। सूचना के आधार पर संयुक्त टीम तत्काल प्लेटफॉर्म नंबर नौ पर पहुंची। रात करीब 7:59 बजे ट्रेन के रुकते ही जनरल कोच में तलाशी अभियान चलाया गया।
चेकिंग के दौरान एक संदिग्ध युवक पुलिस टीम को देखकर भागने का प्रयास करने लगा। हालांकि, सतर्क पुलिसकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए उसे पकड़ लिया। पूछताछ में उसने अपना नाम मोनू कंजड़, पुत्र शंकर कंजड़, निवासी गांधी नगर, थाना जगदीशपुर, जनपद अमेठी बताया। उसकी उम्र करीब 20 वर्ष बताई गई है।
इसके बाद पुलिस टीम ने आरोपी के पास मौजूद दो पिट्ठू बैग, एक जूट की बोरी और एक कपड़े के झोले की तलाशी ली। तलाशी के दौरान इनके भीतर छिपाकर रखे गए 24 जीवित कछुए बरामद हुए। इनमें छह बड़े आकार के और 18 छोटे आकार के कछुए शामिल थे। वन विभाग के अधिकारियों ने इनकी पहचान इंडियन सॉफ्टशेल टर्टल के रूप में की।
पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह अमेठी, सुल्तानपुर और जगदीशपुर क्षेत्र के गांवों में स्थित तालाबों से कछुओं को पकड़ता था। इसके बाद उन्हें बिक्री के लिए पश्चिम बंगाल ले जाया जा रहा था। पुलिस अब इस मामले में तस्करी के नेटवर्क, कछुओं की खरीद-फरोख्त और इसमें शामिल अन्य लोगों के संबंध में आगे की जांच के लिए संबंधित विभागों को जानकारी सौंप चुकी है।
हालांकि, आरोपी के पूछताछ में दिए गए बयान के आधार पर सामने आए तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि और तस्करी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच किया जाना बाकी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने वन विभाग को सूचना दी। इसके बाद वन दरोगा अनिल कुमार श्रीवास्तव अपनी टीम के साथ जीआरपी कैंट थाने पहुंचे। वन विभाग की टीम की मौजूदगी में बरामद कछुओं की गिनती कराई गई, जिसमें कुल 24 जीवित कछुए मिले।
वन विभाग के अधिकारियों ने बरामद कछुओं की अंतरराष्ट्रीय कीमत लगभग 12 लाख रुपये आंकी है। पुलिस ने बताया कि बरामद कछुए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में शामिल प्रजाति के हैं। कछुओं और आरोपी को रात करीब 9:05 बजे वन विभाग की टीम के सुपुर्द कर दिया गया, ताकि नियमानुसार आगे की विधिक कार्रवाई की जा सके।
इस कार्रवाई में जीआरपी कैंट थाना, आरपीएफ पोस्ट वाराणसी, 34वीं वाहिनी पीएसी भुल्लनपुर और सीआईबी बीएसबी की संयुक्त टीम शामिल रही। अभियान का नेतृत्व जीआरपी कैंट के प्रभारी निरीक्षक रजोल नागर और आरपीएफ के प्रभारी निरीक्षक संदीप कुमार यादव ने किया। टीम में जीआरपी के वरिष्ठ उपनिरीक्षक राजबहादुर यादव सहित अन्य पुलिसकर्मी, आरपीएफ के अधिकारी-कर्मचारी तथा सीआईबी के जवान शामिल थे।
रेलवे पुलिस की इस कार्रवाई से वन्यजीवों की अवैध तस्करी के एक मामले का खुलासा हुआ है। अब वन विभाग की जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि कछुओं की तस्करी का नेटवर्क कितना बड़ा है और इनके संग्रह, परिवहन तथा बिक्री में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।