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उत्तर प्रदेश

Project Alankar Yojana: बजट जारी होने के बाद भी 515 स्कूलों में लापरवाही, 62 विद्यालय ही दे पाए प्रमाणपत्र

Uttar Pradesh News: यूपी के एडेड माध्यमिक स्कूलों में प्रोजेक्ट अलंकार की रफ्तार सुस्त चल रही है। दोनों किस्तें मिलने के बाद भी 515 स्कूलों में काम अधूरा।

ओमप्रकाश सिंह परिहार, अमन मौर्या

UP Project Alankar Yojana: प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में जीर्णोद्धार और अवस्थापना सुविधाओं के लिए संचालित प्रोजेक्ट अलंकार योजना में बड़ी संख्या में विद्यालयों में काम अधूरा पड़ा है। योजना के तहत आवेदन करने वाले 577 विद्यालयों में से अब तक केवल 62 विद्यालय ही अपने यहां कार्य पूरा कर प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर सके हैं।

खास बात यह है कि सभी 577 विद्यालयों को योजना के तहत पहली और दूसरी किस्त की राशि जारी की जा चुकी है। इसके बावजूद प्रदेश के 515 विद्यालयों में निर्माण और अवस्थापना से जुड़े काम अभी भी लंबित हैं। निर्माण एजेंसी और विद्यालय प्रबंधन की उदासीनता को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है।

577 विद्यालयों ने किया था आवेदन

प्रोजेक्ट अलंकार के तहत प्रदेश के 4512 अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों को जीर्णोद्धार और अवस्थापना सुविधाओं के लिए अनुदान दिए जाने की व्यवस्था है। इनमें से 577 विद्यालयों ने योजना के तहत आवेदन किया था।

इन सभी को पहली और दूसरी किस्त जारी कर दी गई, लेकिन अब तक महज 62 विद्यालयों ने काम पूरा कर प्रमाणपत्र शासन को प्रस्तुत किया है। इसके अलावा 52 अन्य विद्यालयों ने भी योजना के लिए आवेदन किया है, जिनकी पत्रावलियां शासन स्तर पर लंबित हैं।

प्रयागराज मंडल में 53 विद्यालयों के काम अटके

लंबित कार्यों की स्थिति कई मंडलों में गंभीर है। लखनऊ मंडल में 48 विद्यालयों का काम पूरा नहीं हुआ है, जिनमें 22 विद्यालय लखनऊ जिले के हैं। गोरखपुर मंडल के 56 विद्यालयों में काम लंबित है। इनमें गोरखपुर के 24, महराजगंज के 18, देवरिया के नौ और कुशीनगर के पांच विद्यालय शामिल हैं। प्रयागराज मंडल में 53 विद्यालयों के काम अटके हैं। इनमें कौशांबी और प्रयागराज के नौ-नौ, जबकि प्रतापगढ़ के 25 और फतेहपुर के 10 विद्यालय शामिल हैं।

मेरठ में सबसे अधिक लंबित

वाराणसी मंडल के 36 विद्यालयों ने योजना के लिए आवेदन किया था, जिनमें 35 के काम अधूरे हैं। चित्रकूट मंडल के सात विद्यालयों के काम भी अटके हैं। मेरठ मंडल में 63 विद्यालयों ने भवन निर्माण और अवस्थापना सुविधाओं के लिए आवेदन किया था। इनमें 61 विद्यालयों में काम अधूरा है। मंडलवार आंकड़ों में मुरादाबाद के 32 में 29, बस्ती के 20, बरेली के 21, कानपुर के 42, झांसी के 17, सहारनपुर के छह, आजमगढ़ के 10, मिर्जापुर के चार, देवीपाटन के 20, अयोध्या के 45, आगरा के 22 और अलीगढ़ के 19 विद्यालयों में काम धीमी गति से चल रहा है।

75 वर्ष पूरे कर चुके विद्यालयों को मिल रहा लाभ

प्रोजेक्ट अलंकार के प्रभारी एवं संयुक्त वित्त महेंद्र कुमार सिंह के अनुसार योजना का लाभ मान्यता के 75 वर्ष पूरे कर चुके विद्यालयों को भी दिया जा रहा है। विशेष परिस्थिति में जिला स्तरीय समिति की संस्तुति पर पात्र विद्यालयों को लाभ मिल सकता है।

14 अक्तूबर 1986 तक मान्यता प्राप्त ऐसे माध्यमिक विद्यालय, जिनकी मान्यता अवधि 50 वर्ष पूरी नहीं हुई है और भवन जर्जर स्थिति में है, उन्हें भी योजना का लाभ दिया जा सकता है। वहीं, 300 से कम छात्र संख्या वाले विद्यालय योजना के दायरे से बाहर हैं। अनुदान राशि का निर्धारण छात्र संख्या के आधार पर किया जा रहा है।

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