UP Panchayat Election News: उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने और पंचायत चुनाव को लेकर दाखिल जनहित याचिकाओं पर मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ कर रही है। सुनवाई के दौरान अपर महाधिवक्ता अदालत में मौजूद नहीं थे।
वहीं, मामले में न्याय मित्र (एमिकस क्यूरी) बनाए गए वरिष्ठ अधिवक्ता भी अदालत में उपस्थित नहीं हो सके। इसके चलते मामले की सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी और अगली सुनवाई के लिए 7 अक्टूबर 2026 की तारीख निर्धारित की गई।
इस मामले में ग्राम प्रधानों को उनके कार्यकाल की समाप्ति के बाद प्रशासक नियुक्त किए जाने की व्यवस्था को चुनौती दी गई है। इसके अलावा पंचायत चुनाव समय पर नहीं कराए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। मामले में अब तक छह जनहित याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं, जिनमें सरकार के आदेश और पंचायत राज व्यवस्था से जुड़े कानूनी प्रावधानों को चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से मुख्य रूप से यह सवाल उठाया गया है कि निर्वाचित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक बनाए रखने की व्यवस्था संविधान और पंचायती राज व्यवस्था की भावना के अनुरूप है या नहीं। एक याचिका में उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा 12(3-ए) की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी गई है।
इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट की विभिन्न पीठों में हुई सुनवाई के दौरान पंचायत चुनाव में देरी और निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के मुद्दे पर राज्य सरकार से जवाब मांगा जा चुका है। अदालत में यह मुद्दा भी सामने आया कि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित प्रतिनिधियों के स्थान पर प्रशासकों की व्यवस्था कितनी वैधानिक है।
अब 7 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में राज्य सरकार का पक्ष और मामले में नियुक्त एमिकस क्यूरी की सहायता महत्वपूर्ण होगी। छह जनहित याचिकाओं में उठाए गए कानूनी और संवैधानिक सवालों पर अदालत आगे की सुनवाई करेगी।