

Supreme Court On Lakhimpur Kheri Violence: लखीमपुर खीरी 2021 हिंसा मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई की। सुनवाई के दौरान SC ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस से इस पूरे मामले के पीठासीन अधिकारी के कामकाज पर रिपोर्ट मांगी। उन पर एनडीपीएस और एससी/एसटी अत्याचार से जुड़े कई मामले को अपने पास लेने और आरोपियों को बरी करने का आरोप है।
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्य कांत, वी. मोहना और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को पूरे मामले की सुधारात्मक कार्रवाई करने और दावों की जांच करने के बाद सीलबंद लिफाफे में पूरी रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया।
इस पूरे मामले में चश्मदीद गवाह की तरफ से कोर्ट में पेश हुए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि बीमारी के कारण कोर्ट में उपस्थित नहीं हो पाने के कारण पीठासीन अधिकारी ने उनके मुवक्किल के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। भूषण के अनुसार, पीठासीन अधिकारी का यह व्यवहार अदालत को हैरान करने वाला है।
पीठासीन अधिकारी ने एससी/एसटी और एनडीपीएस मामलों को स्वयं अपने पास ले लिया। साथ ही आरोपियों को मामले में बरी कर दिया गया। भूषण के मुताबिक, कानून के तहत वे ऐसा नहीं कर सकते हैं।
आगे उन्होंने बताया कि सरकारी वकील को भी बीच में ही बदला गया और जो नया वकील आया उसके पास केवल चार महीने का ही अनुभव है। इस पर बेंच ने यूपी सरकार से को आदेश दिया कि इस मामले में सबसे वरिष्ठ सरकारी वकील को ढूंढे, जिसे इस मामले में सेशन ट्रायल चलाने का काफी अनुभव हो और दो हफ्ते में अदालत को इसकी जानकारी दे।
सर्वोच्च न्यायालय ने इम मामले की अब अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद तय की ही। इसके साथ ही 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत शर्तों में और ढील देने से साफ इनकार कर दिया।
बता दें, पिछले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले, 3 अक्तूबर, 2021 को, यूपी के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया में डीप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के दौरे के खिलाफ किसानों ने विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान वहां 4 किसानों सहित 8 लोगों की मौत हो गई थी। घटनास्थल पर ही एक एसयूवी कार ने 4 किसानों को कुचल दिया था। इससे नाराज किसानों ने कथित तौर पर एक ड्राइवर के साथ दो बीजेपी कार्यकर्ताओं की जमकर पिटाई की। इससे उसकी मौत हो गई थी।
लखीमपुर खीरी हिंसा में ही एक पत्रकार की भी मौत हुई थी। मामले में दिसंबर, 2023 में, ट्रायल कोर्ट द्वारा मिश्रा समेत 12 अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश, हत्या और अन्य अपराधों का आरोप तय किया गया। इससे मुख्य मामले में ट्रायल शुरू होने का रास्ता खुल गया।