

Vijay Mallya High Court Warning: बॉम्बे हाई कोर्ट ने भगोड़े आर्थिक अपराधी विजय माल्या को सोशल मीडिया पर अदालती दस्तावेज पोस्ट करने के खिलाफ सख्त चेतावनी दी है। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जांच किए जा रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED के हलफनामे को बिना इजाजत X पर डालने पर अदालत ने कड़ी आपत्ति जताई।
माल्या की ओर से ब्रिटेन के अदालती आदेशों का हवाला देकर भारत न लौटने के तर्कों पर भी हाई कोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर तय करते हुए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और सॉलिसिटर जनरल को नए हलफनामे दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
ED की आपत्ति के बाद जस्टिस मिलिंद जाधव ने माल्या के वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई से अपने मुवक्किल को भविष्य में ऐसी गतिविधि दोबारा न करने की चेतावनी देने को कहा। अदालत ने इस आचरण को गंभीर बताते हुए कहा कि जो कुछ भी अदालत के सामने रखना है, उसे अदालत में ही पेश किया जाना चाहिए।
हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह से दस्तावेज सोशल मीडिया पर डालना अदालत की प्रक्रिया की प्रभावशीलता को प्रभावित करता है। अदालत की यह टिप्पणी उस समय आई जब मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ी कार्यवाही अभी लंबित है।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को तय की है। अदालत ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यानी SBI को ED की ओर से सामने रखी गई जानकारियों को ध्यान में रखते हुए नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
ED ने अपने हलफनामे में कहा है कि अगस्त 2021 तक करीब 14,131.6 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां SBI के नेतृत्व वाले बैंकों के कंसोर्टियम को सौंप दी गई थीं। हालांकि, एजेंसी का कहना है कि संपत्तियों की रिकवरी से माल्या के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की कार्यवाही अपने आप खत्म नहीं होती।
माल्या ने फरवरी में हाई कोर्ट को बताया था कि वह यह बताने की स्थिति में नहीं हैं कि भारत कब लौटेंगे। उनके वकील अमित देसाई ने ब्रिटेन की अदालतों के आदेशों का हवाला देते हुए कहा था कि माल्या के खिलाफ चल रही कार्यवाही और प्रतिबंधों के कारण उनके लिए ब्रिटेन छोड़ना संभव नहीं है।
हालांकि, हाई कोर्ट ने उनके भारत लौटकर अदालत के सामने पेश होने के इरादे पर सवाल उठाए। अदालत ने यह भी पूछा कि जिन ब्रिटिश अदालतों के आदेशों का हवाला दिया जा रहा है, क्या उन्हें चुनौती दी गई है।
हाई कोर्ट विजय माल्या की दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। एक याचिका में उन्होंने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम यानी FEOA के तहत खुद को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किए जाने को चुनौती दी है। दूसरी याचिका में औपचारिक रूप से उन्हें भगोड़ा घोषित करने वाले आदेश को चुनौती दी गई है।
माल्या ने 2020 में आपराधिक कार्यवाही बंद करने की मांग भी की थी। ED का कहना है कि बैंकों द्वारा संपत्तियों की रिकवरी किए जाने से मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप खत्म नहीं होते। माल्या मार्च 2016 में भारत से चले गए थे और नवंबर 2016 में उन्हें घोषित अपराधी घोषित किया गया था।