BJP on PDA Pathshala: उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों के मर्जर पर सियासत गर्मायी हुई है। योगी सरकार ने आर्थिक बोझ कम करने के लिए उत्तर प्रदेश के 5 हजार स्कूलों के मर्जर की योजना बनाई थी। इसमें ऐसे स्कूल शामिल थे, जिसमें कम बच्चे और स्कूलों की हालत खराब थी। वहीं समाजावादी पार्टी ने योगी सरकार के इस फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। स्कूलों के मर्जर के विरोध में समाजवादी पार्टी की तरफ से पीडीए पाठशाला की शुरुआत की गई।
वहीं अब पीडीए पाठशाला को लेकर अखिलेश यादव पर यूपी भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सपा की ओर से शुरू की गई ‘पीडीए पाठशाला’ के तहत बच्चों को ‘ए' फॉर अखिलेश’ और ‘डी फॉर डिंपल’ जैसे पाठ पढ़ाए जा रहे हैं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह चौधरी ने इस कदम को 'राजनीतिक विष घोलने की साजिश' करार देते हुए इसे बच्चों की शिक्षा के साथ खिलवाड़ बताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि बच्चों के भविष्य को किसी राजनीतिक दल की प्रयोगशाला नहीं बनने दिया जाएगा। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह चौधरी ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर कहा कि सपा की ‘पीडीए पाठशाला’ बच्चों की कोमल चेतना में राजनीतिक विचारधारा थोपने का प्रयास है।
भाजपा अध्यक्ष चौधरी ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि यह शिक्षा नहीं, समाजवादी ब्रेनवॉश है। जब सपा सत्ता में थी, तब भी उसने बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया और अब फिर वही मानसिकता सामने आ रही है। ए फॉर एपीजे अब्दुल कलाम पढ़ाते, तो बात होती चौधरी ने कहा कि समाजवादी पार्टी की सोच आज भी परिवारवाद से ऊपर नहीं उठ पाई है। अगर उन्हें सच में बच्चों के भविष्य की चिंता होती तो वे ‘ए' फॉर अब्दुल कलाम’, ‘डी फॉर डॉ. अंबेडकर’ सिखाते, लेकिन उन्होंने पाठशाला को भी परिवारवाद से जोड़ दिया है। उन्होंने इसे शिक्षा के नाम पर बच्चों के मन-मस्तिष्क में सस्ती राजनीति घोलने की घोर निंदा की।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि शिक्षा को राजनीति से मुक्त रखना चाहिए ताकि बच्चे निष्पक्ष और तार्किक सोच के साथ विकसित हो सकें। हम बच्चों की शिक्षा को किसी भी राजनीतिक विचारधारा का शिकार नहीं बनने देंगे। हम हर मंच पर इस विकृत मानसिकता के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने याद दिलाया कि समाजवादी पार्टी के 2012-2017 के शासनकाल में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई थी। स्कूलों में शिक्षक नहीं थे, भवन जर्जर थे और नकल माफिया हावी थे। शिक्षा के नाम पर सिर्फ घोषणाएं होती थीं।- एजेंसी इनपुट के साथ