संभल गैंगरेप हत्याकांड पर कोर्ट का फैसला (फोटो- सोशल मीडिया) 
उत्तर प्रदेश

हवनकुंड की राख, कपड़ों पर 'सीमेन' के दाग और 7 साल की बेटी; संभल गैंगरेप-मर्डर केस की खौफनाक इंसाफ

Uttar Pradesh के संभल में इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना जो साढ़े सात साल पहले महिला के साथ हैवानित कर उसे मंदिर के हवनकुंड में जिंदा जला दिया। मामले में अदालत ने अपना फैसला सुनाया।

सौरभ शर्मा

Sambhal Gangrape Murder Verdict: उत्तर प्रदेश के संभल में इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना पर आखिर न्याय की जीत हुई है। साढ़े सात साल पहले एक महिला को मंदिर के हवनकुंड में जिंदा जला दिया गया था। इस रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले में 19 दिसंबर 2025 को अदालत ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया। मासूम बेटी की गवाही और पीड़िता की आखिरी फोन कॉल ने चार दरिंदों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। पोक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश अवधेश कुमार सिंह ने दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

यह खौफनाक वारदात 13 जुलाई 2018 की रात रजपुरा थाना क्षेत्र के पाठकपुर गांव में हुई थी। उस वक्त महिला का पति मजदूरी के लिए दिल्ली गया हुआ था और घर में वह अपनी सात साल की बेटी के साथ अकेली थी। तभी पांच दरिंदे घर में घुस आए और बच्ची के सामने ही मां के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। जाते-जाते वे धमकी दे गए। बदहवास महिला ने अपने ममेरे भाई को फोन कर रोते हुए आपबीती बताई और आरोपियों के नाम लिए, लेकिन इससे पहले कि कोई मदद आती, दरिंदे वापस आए और उसे घसीटते हुए मंदिर के हवनकुंड में ले जाकर जिंदा फूंक दिया।

कपड़ों पर मिले दाग ने खोली पोल

पुलिस ने जब जांच शुरू की तो फॉरेंसिक रिपोर्ट और मोबाइल कॉल रिकॉर्डिंग सबसे बड़े हथियार बने। फॉरेंसिक लैब की जांच में आरोपियों के कपड़ों पर सीमेन के निशान पाए गए, जिसने बचाव पक्ष के सारे दावों की हवा निकाल दी। इसके अलावा सात साल की उस मासूम बच्ची ने अदालत में अपनी आंखों देखी जो गवाही दी, उसने जज को भी हिला कर रख दिया। इन पक्के सबूतों के आधार पर अदालत ने आरोपी आराम सिंह, महावीर, भोना उर्फ कुंवरपाल और जयवीर उर्फ गुल्लू को दोषी करार देते हुए ताउम्र जेल में रहने की सजा सुनाई। अदालत ने दोषियों पर 1 लाख 12 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

जब सीएम योगी ने एसपी को नापा

इस कांड की गूंज लखनऊ तक सुनी गई थी। मामले में लापरवाही बरतने और पीड़िता का नाम उजागर करने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा रुख अपनाते हुए संभल के तत्कालीन एसपी आरएम भारद्वाज को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया था। यह फैसला उस वक्त प्रशासन के लिए एक बड़ी नजीर बना था। इधर, फैसला आने के बाद पीड़िता के परिवार ने राहत की सांस ली है। ममेरे भाई ने कहा कि उन्हें दरिंदों के लिए फांसी की उम्मीद थी, लेकिन वे कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। वहीं, पुलिस कस्टडी में जाते वक्त भी दोषी इसे साजिश बताते रहे। बता दें कि इस केस में एक आरोपी नाबालिग है, जिसकी प्रक्रिया अलग चल रही है।

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