चंपत राय (सोर्स सोशल मीडिया) 
उत्तर प्रदेश

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में घिरे चंपत राय, SIT की रिपोर्ट के बाद संतों का फूटा गुस्सा, क्या जाएगी कुर्सी?

Champat Rai Controversy: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर सवाल उठ रहे हैं।

वंदना शर्मा

Ram Mandir Donation Theft Case:  उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर सवाल उठ रहे हैं। मंदिर निर्माण में उनकी अहम भूमिका रही है। लेकिन अब इस मामले की जांच चल रही है। कुछ संतों और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों ने भी मामले को लेकर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल सभी की नजर एसआईटी की जांच रिपोर्ट पर टिकी है। जिससे पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।

चंपत राय पर उठे सवाल

राम मंदिर की स्थापना के समय ज्यादातर साधु संत इस बात से नाराज थे, कि जिन लोगों ने मंदिर आंदोलन में आगे बढ़कर भाग लिया था। उन्हें पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया। बता दें, कि कई वर्षों से नाराज चल रहे साधु-संत और महंत भी उनके खिलाफ खुलकर सामने आ गए हैं। फिर चाहे वह विनय कटियार हों, संतोष दुबे हों या छोटी छावनी के महंत कमल नयन दास, सभी ने चंपत राय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इस वजह से चंपत राय को कटघरे में खड़ा किया जाने लगा है।

विनय कटियार ने चढ़ावे में हुई चोरी का खुलासा

रिपोर्ट के मुताबिक RSS के साथ विश्व हिंदू परिषद से जुड़े प्रचारक चंपत राय बहुत ईमानदार और व्यवहार से थोड़े सख्त माने जाते है। लेकिन उनके जिद्दी होने की छवि ने उन्हें राम मंदिर से जुड़े एक समझौता न करने वाले शख्स के तौर पर स्थापित कर दिया गया है। चंपत राय राम मंदिर बनने से पहले तक मंदिर निर्माण के लिए समर्पित सबसे बड़े चेहरों में शामिल हो चुके थे। आपको बता दें कि चंपत राय ने अपना पूरा जीवन मंदिर के निर्माण के नाम पर समर्पित कर दिया। विनय कटियार ने तो साफ कह दिया था कि चंपत राय ने अपराध किया है। वह जल्द ही चढ़ावे में हुई चोरी का खुलासा करेंगे। हालांकि बाद में उन्होंने यू-टर्न ले लिया और चुप हो गए।

बातों को मानने से कर दिया इंकार

ऐसा करने से सभी साधु-संतों से उनका व्यवहार अच्छा बन गया। लेकिन जब राम मंदिर के बनने का समय आया, तो उस समय चंपत राय ने अयोध्या के ज्यादातर साधु-संतों की बातों को मानने से इंकार कर दिया। राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कई संत और नेता मंदिर निर्माण से जुड़े फैसलों में खुद को अलग-थलग महसूस करते रहे। इसी वजह से कई बार उनकी नाराजगी भी सामने आई।

व्यक्ति के चरित्र हनन करना अनुचित

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री के बेहद खास माने जाने वाले नृपेंद्र मिश्र ने मंदिर के कामकाज में हुई बड़ी गड़बड़ी से जुड़ी सभी बातों को स्वीकार किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने ही कार्यक्रम से चंपत राय को दूर किया। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी वजह से किसी भी व्यक्ति के चरित्र का हनन नही करना चाहिए।

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