UP TET Result Controversy: उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) 2026 का परिणाम जारी होने के पांच दिन बाद ही अभ्यर्थियों का आक्रोश सड़क पर उतर आया। सोमवार को सैकड़ों अभ्यर्थियों ने राज्य शिक्षा सेवा चयन आयोग के बाहर प्रदर्शन कर हंगामा किया और सड़क जाम कर दी। प्रदर्शनकारियों ने करीब 60 हजार अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट रिजेक्ट किए जाने और नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। अभ्यर्थियों का आरोप है कि तकनीकी खामियों और ओएमआर भरने में हुई मामूली चूक के चलते बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का परिणाम प्रभावित हुआ है। उन्होंने आयोग से रिजेक्ट किए गए आवेदनों की दोबारा जांच कर योग्य अभ्यर्थियों को राहत देने की मांग की।
अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा के दौरान ओएमआर शीट पर गोला भरने, रोल नंबर, बुकलेट नंबर अथवा विषय संबंधी विकल्प भरने में हुई छोटी-छोटी गलतियों के कारण करीब 60 हजार अभ्यर्थियों को रिजेक्टेड स्टेटस दिखाया गया है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कक्ष निरीक्षकों की ओर से भी ओएमआर शीट की जांच में अपेक्षित सावधानी नहीं बरती गई। इसका असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ा, जिन्होंने परीक्षा में सफल होने लायक अंक हासिल किए थे। अभ्यर्थियों की मांग है कि रिजेक्ट किए गए सभी मामलों की दोबारा जांच कर वास्तविक रूप से पात्र अभ्यर्थियों को परिणाम में शामिल किया जाए।
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया को लेकर भी आपत्ति जताई। उनका आरोप है कि अलग-अलग पालियों में परीक्षा होने के बाद अंकों के सामान्यीकरण की प्रक्रिया से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का परिणाम प्रभावित हुआ। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिला और कई योग्य अभ्यर्थी परीक्षा में असफल हो गए। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया और उससे जुड़े अंकों की दोबारा समीक्षा की जाए। उनका कहना है कि सभी अभ्यर्थियों के साथ समान व्यवहार करते हुए पारदर्शी तरीके से परिणाम तैयार किया जाना चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष अजीत सिंह, संजय यादव समेत सैकड़ों अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई। अभ्यर्थियों ने आयोग के अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपकर रिजेक्ट किए गए आवेदन और ओएमआर शीट की दोबारा जांच की मांग की। उनका कहना है कि रोल नंबर, बुकलेट नंबर, हिंदी या संस्कृत विषय का गोला भरने में यदि कोई सामान्य चूक हुई है तो उसे आधार बनाकर अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए। आयोग ने प्रदर्शनकारियों से अपनी आपत्तियां लिखित रूप में देने को कहा और उनकी मांगों पर आने वाले दिनों में निर्णय लेने का आश्वासन दिया। हालांकि अभ्यर्थियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर लिखित समाधान नहीं दिया गया तो उनका धरना अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा।