UP Aajeevika Mission Prayagraj: उत्तर प्रदेश में आजीविका मिशन का मॉडल न केवल ग्रामीण स्वास्थ्य के ढांचे को सुदृढ़ कर रहा है, बल्कि गांव की महिलाओं को आर्थिक रूप से भी आत्मनिर्भर बना रहा है। इसी कड़ी में स्वास्थ्य सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए 'स्वास्थ्य सखियों' का चयन किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य, पोषण , स्वच्छता और लिंग आधारित जागरूकता में इससे सुधार हो रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और संकोच के कारण अक्सर महिलाएं अपनी बीमारियां परिजनों से छिपा लेती हैं, जिसका सीधा असर गर्भवती महिला और उसके शिशु पर पड़ता है | इसके लिए स्थानीय महिलाओ को निगरानी और जागरूकता की जिम्मेदारी देकर स्वास्थ्य विभाग और महिलाओं के बीच सेतु बनाने का कार्य करती हैं स्वास्थ्य सखियां। प्रयागराज की उपायुक्त एन आर एल एम शमा सिंह का कहना है कि उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को सुगम और प्रभावी बनाने के लिए स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को 'स्वास्थ्य सखी' के रूप में तैनात किया गया है।
प्रयागराज जनपद मे समूह की 1208 महिलाओं को इसकी जिम्मेदारी दी गई है । ब्लॉक स्तर पर पारदर्शी चयन प्रक्रिया और लिखित परीक्षा के माध्यम से योग्य महिलाओं का चयन किया गया है। चयन के बाद इन सखियों को मातृ-शिशु स्वास्थ्य, प्राथमिक उपचार, पोषण और टीकाकरण से संबंधित विशेष प्रशिक्षण दिया गया है , ताकि इनके माध्यम से गांव-गांव तक स्वास्थ्य जागरूकता की अलख जगाई जा सके।
स्वास्थ्य सखी उसी गांव की रहने वाली स्वयं सहायता समूह का हिस्सा होती हैं जिसके अंतर्गत यह महिला स्वयं समूह आता है। इस वजह से गांव की महिलाएं अपनी शारीरिक समस्याओं, गर्भावस्था संबंधी दिक्कतों और माहवारी स्वच्छता जैसे विषयों पर बिना किसी झिझक के खुलकर इन स्वास्थ्य सखियों से बात कर पाती हैं उन्हे अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को साझा करती हैं । डीसी एन आरएलएम शमा सिंह का कहना है कि स्वास्थ्य सखियां मुख्य रूप से ग्रामीण परिवारों, आशा बहुओं, एएनएम और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों के बीच एक मजबूत कड़ी के रूप में कार्य कर रही हैं।
गांव की गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच और उनके पोषण का ध्यान रखना, संस्थागत प्रसव के लिए प्रोत्साहित करते हुए प्रसव के लिए महिलाओं को प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक ले जाने के लिए प्रेरित करना, प्राथमिक स्वास्थ्य किट के माध्यम से गांव की महिलाओं के बीपी , एनीमिया जैसे बुनियादी स्वास्थ्य मानकों की नियमित जांच करना और शिशुओं के नियमित टीकाकरण और कुपोषण की रोकथाम के लिए आंगनवाड़ी व एएनएम के साथ समन्वय स्थापित करना इनकी प्रमुख जिम्मेदारी है । इसके अलावा हर गर्भवती महिला को सरकारी योजनाओं के लाभ से जोड़ना और प्रसव या अचानक बीमारी की स्थिति में 102 और 108 एम्बुलेंस सेवा को तुरंत संपर्क कर मरीजों को अस्पताल पहुचाने का कार्य इन्हे दिया गया है।
ग्रामीण क्षेत्र मे स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत और विस्तार देने मे इन स्वास्थ्य सखियों की भूमिका महत्वपूर्ण है | स्वास्थ्य सखियों को उनके कार्यों के आधार पर मानदेय प्रदान किया जा रहा है, जिससे उनका सामाजिक और आर्थिक स्तर ऊपर उठ रहा है। जिला मिशन मैनेजर विराज सिंह बताते हैं कि स्वास्थ्य सखियों को महीने मे 30 दिन कार्य नहीं करना होता है | न्यूनतम 10 दिन इन्हे कार्य मिलता है जिसके लिए 200 रुपये प्रतिदिन का मानदेय इन्हे प्रदान किया जाता है | सोरांव के माधोपुर गांव की स्वास्थ्य सखी सरिता पाल का कहना है कि घर का कामकाज करने के बाद जो खाली समय बचता है उसका उपयोग अब वह स्वास्थ्य सखी तौर पर प्रदान किये कार्यों मे करती हैं |
इससे हर महीने 2200 तक का मानदेय उन्हे मिल जाता है जिसे गृहस्थी का सामान खरीदने मे वह इस्तेमाल कर लेती हैं । फूलपुर के डूडी बाग गांव की रहने वाली सोनम का कहना है स्वास्थ्य सखी के तौर गाँव की महिलाओ की मदद करने से गाँव और मोहल्ले मे उनकी नई पहचान बनी है , लोग अधिक सम्मान देते है साथ ही मिलने वाले मानदेय से घर के बजट भी संभल जाता है।