राजा भैया बोले- धीरेंद्र शास्त्री की रामकथा कुंडा में होकर रहेगी
अखिलेश ने आपत्ति जताते हुए रोक लगाने की मांग की थी
राजा भैया ने विरोध करने वाले सपा नेताओं को रामकथा में आने का न्योता दिया
Raja Bhaiya VS Akhilesh Yadav: कुंडा में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की प्रस्तावित रामकथा को लेकर राजनीति गरमा गई है। धीरेंद्र शास्त्री के भगवान श्रीकृष्ण और यदुवंशियों को लेकर दिए गए बयानों पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की आपत्ति के बाद अब कुंडा विधायक और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के संस्थापक अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने उन्हें चुनौती दी है।
राजा भैया ने कहा कि पंडित धीरेंद्र शास्त्री 17 से 19 नवंबर तक कुंडा में कथा करेंगे। किसी की मां ने दूध पिलाया है तो रोककर दिखाए।
राजा भैया ने इस मामले में सपा नेताओं पर भी तंज कसा। उन्होंने सनातन का विरोध करने वाले नेताओं को सस्नेह आमंत्रित करते हुए कहा कि कुंडा की धरती उनके स्वागत के लिए तैयार है। समाजवादी पार्टी के नेताओं की ओर से रामकथा का विरोध करने के आह्वान के बाद जनसत्ता दल परिवार की ओर से सभी सपा नेताओं को कार्यक्रम में आने का न्योता दिया गया है।
राजा भैया ने नेताओं से 17 से 20 नवंबर 2026 तक बेंती राजभवन, कुंडा हवाई पट्टी पर होने वाली श्रीराम कथा में समय से पहले पहुंचने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वहां उनका विधिवत नागरिक अभिनंदन किया जाएगा। इसके लिए समय का विशेष ध्यान रखने की बात भी कही गई है।
दरअसल, पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप और यदुवंशियों को लेकर दिए गए बयानों के बाद विवाद शुरू हुआ। अखिलेश यादव ने इन बयानों पर आपत्ति जताई और धार्मिक भावनाएं आहत होने का आरोप लगाया।
उन्होंने सरकार और प्रशासन से ऐसे कार्यक्रमों को अनुमति नहीं देने की मांग की। इसके बाद कुंडा में प्रस्तावित रामकथा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई।
अखिलेश यादव और राजा भैया के बीच राजनीतिक खींचतान पहले भी कई बार सामने आ चुकी है। पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान अखिलेश यादव ने कुंडा में कुंडी लगाने का बयान दिया था। इस पर राजा भैया ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी।
इसके बाद दोनों नेताओं के बीच कई मौकों पर जुबानी जंग देखने को मिली। कभी राजनीतिक समीकरणों के चलते एक-दूसरे के करीब रहे दोनों नेताओं के रिश्तों में आई दूरी अब सार्वजनिक बयानों में भी दिखाई देती है।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कुंडा की रामकथा ने एक बार फिर अखिलेश यादव और राजा भैया को आमने-सामने ला दिया है। धार्मिक बयानों पर आपत्ति, रामकथा के आयोजन और राजा भैया की चुनौती के बाद यह मामला अब प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।