अतीक-अशरफ (फाइल फोटो)
प्रयागराज

अतीक की मौत के बाद भी जारी खेल? 40 से ज्यादा प्लॉटों की दोबारा रजिस्ट्री, रिश्तेदार हड़प रहे करोड़ों की जमीन

Prayagraj Land Fraud Case: प्रयागराज में पहले से बिक चुकी 40 से अधिक जमीनों की कथित तौर पर दोबारा रजिस्ट्री कराने का मामला सामने आया है। अतीक अहमद के रिश्तेदारों पर करोड़ों की जमीन हड़पने का आरोप है।

ओमप्रकाश सिंह परिहार, स्निग्धा श्रीवास्तव

Atiq Ahmed Gang Land Fraud: माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की मौत के बाद भी उनके गुर्गों की अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह लगाम नहीं लग सकी है। जमीनों की खरीद-फरोख्त में कथित फर्जीवाड़े का एक नया मामला सामने आया है। आरोप है कि अतीक के रिश्तेदार और उसके गिरोह से जुड़े लोगों ने पहले ही बिक चुकी जमीनों को मूल भू-स्वामियों के वारिसों से मिलीभगत कर दोबारा बैनामा करा दिया। मामले में प्रशासन ने जांच और कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

दोबारा रजिस्ट्री कराकर करोड़ों की जमीन पर कब्जे का आरोप

एडीएम वित्त एवं राजस्व विनिता सिंह की रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने एसडीएम सदर अंकिता वर्मा को जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक मनौहरदास अकबरपुर निवासी भूमाफिया और अतीक के रिश्तेदार जफर मसूद पुत्र मोहम्मद मसूद समेत अनंत कुमार पांडेय आदि पर पहले से बिक चुकी जमीन को उसके मूल स्वामी के वारिसों से मिलीभगत कर अवैध तरीके से दोबारा बैनामा कराने का आरोप है।

बताया गया है कि पिछले सात-आठ महीनों में जफर और उसके गिरोह के सदस्यों ने ऐसी 40 से अधिक प्लॉटों की दोबारा रजिस्ट्री कराई। आरोप है कि इन बैनामों में फर्जी कागजात का इस्तेमाल किया गया। इतना ही नहीं, इनमें से कई प्लॉटों पर कब्जा भी किए जाने की बात सामने आई है।

जमीन के मूल मालिकों के वारिसों से मिलीभगत का आरोप

मामला सामने आने के बाद उन लोगों की परेशानी बढ़ गई है, जिन्होंने संबंधित प्लॉट पहले ही खरीदे थे। आरोप है कि रजिस्ट्री कराने के बावजूद अब उन्हें अपनी जमीन पर कब्जे को लेकर प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कई मामलों में जमीन पर दूसरे लोगों के कब्जे की शिकायत भी सामने आई है।

एडीएम की रिपोर्ट पर पांच दिन में जांच का आदेश

एडीएम वित्त एवं राजस्व की रिपोर्ट पर डीएम ने एसडीएम सदर की अध्यक्षता में राजस्व टीम गठित कर दी है। टीम को पूरे प्रकरण की जांच कर पांच दिन के भीतर रिपोर्ट देने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इससे उन लोगों को राहत की उम्मीद है, जिन्होंने पहले जमीन खरीदी और अब कथित फर्जी बैनामों के कारण अपने ही प्लॉट को लेकर परेशानी झेल रहे हैं।

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