

INS Nipun Features: भारतीय नौसेना की रणनीतिक और सामरिक ताकतों में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। मुंबई स्थित नेवल डॉकयार्ड में आयोजित एक भव्य कमीशनिंग समारोह के दौरान निस्तार-क्लास के दूसरे डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) INS निपुण को आधिकारिक तौर पर नौसेना में शामिल कर लिया गया।
इस अवसर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने कहा कि वर्तमान समय रणनीतिक बदलावों का दौर है, जहां सुरक्षा संबंधी चुनौतियां लगातार नया रूप ले रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि INS निपुण समुद्र में मल्टी-डोमेन डीप-वॉटर ऑपरेशन्स के लिए भारतीय नौसेना की खास अंडरवाटर कैपेबिलिटीज में एक पावरफुल एडिशन साबित होगा।
एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि एक लड़ाकू नौसेना के रूप में, हर समय युद्ध के लिए तैयार रहना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी और पहली प्राथमिकता है। आज इस उन्नत युद्धपोत का शामिल होना केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह हमारे उस संकल्प को दोहराने का अवसर है, जिसके तहत हम भारत के समुद्री हितों की रक्षा के लिए एक मजबूत और तत्पर ऑपरेशनल क्षमता का निर्माण कर रहे हैं।
भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने कहा कि भविष्य के खतरों का सटीक अनुमान लगाना भले ही हमेशा संभव न हो, लेकिन हम उनसे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए खुद को हर समय पूरी तरह तैयार रख सकते हैं।
INS निपुण को हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL), विशाखापत्तनम द्वारा पूरी तरह देश में ही डिजाइन और निर्मित किया गया है। यह जहाज भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का एक बेहतरीन उदाहरण है। इसे विशेष रूप से गहरे समुद्र में डाइविंग और जटिल अंडरवाटर ऑपरेशन्स की एक बड़ी रेंज को सपोर्ट करने के लिए तैयार किया गया है।
INS निपुण आधुनिक डाइविंग सिस्टम्स और अंडरवाटर इंटरवेंशन कैपेबिलिटीज से पूरी तरह लैस है, जो समुद्र की विषम परिस्थितियों में काम करने वाले गोताखोरों को निरंतर और सुरक्षित सपोर्ट प्रदान करता है।
इसमें उन्नत नेविगेशन, प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट और सटीक स्टेशन-कीपिंग जैसी आधुनिक प्रणालियां शामिल हैं। इसके अलावा, इसमें सबमरीन रेस्क्यू ऑपरेशन्स, डाइविंग और आपातकालीन मेडिकल सपोर्ट के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
पश्चिम नौसेना कमान के तहत पश्चिमी तट पर तैनात होकर INS निपुण नौसेना की सबमरीन रेस्क्यू कैपेसिटी को कई गुना बढ़ाएगा। यह उपलब्धि न केवल देश की समुद्री सीमाओं को सुरक्षित करेगी, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत को एक प्रमुख समुद्री शक्ति के रूप में और अधिक मजबूत करेगी।