लेटे हनुमान मंदिर  (सोर्स- फोटो नवभारत)
प्रयागराज

संगम तट पर दिखा अद्भुत नजारा; गंगा के बढ़े जलस्तर से जलमग्न हुए लेटे हनुमान जी, दर्शन को उमड़े श्रद्धालु

Prayagraj Sangam Ghat: संगम तट पर गंगा का बढ़ा जलस्तर लेटे हनुमान मंदिर परिसर तक पहुंच गया। श्रद्धालुओं ने इसे मां गंगा द्वारा बजरंगबली के पवित्र जलाभिषेक का दिव्य अवसर मानकर जय श्रीराम के जयकारे लगाए

ओमप्रकाश सिंह परिहार, स्निग्धा श्रीवास्तव

Lete Hanuman Temple Prayagraj: तीर्थराज प्रयागराज के पावन संगम तट पर शनिवार और रविवार की दरम्यानी रात को अद्भुत और भक्तिमय दृश्य देखने को मिला। संगम के समीप स्थित प्रसिद्ध लेटे बड़े हनुमान जी मंदिर में मां गंगा ने अपने बढ़े हुए जलस्तर के साथ स्वयं बजरंगबली का जलाभिषेक कर दिया। गंगा की धारा मंदिर परिसर में पहुंची तो भक्तों ने इसे मां गंगा द्वारा संकटमोचन हनुमान जी को कराया गया पवित्र स्नान माना। इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बने श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर जय श्रीराम और जय हनुमान के जयकारे लगाए।

जलधारा के साथ मंदिर तक पहुंचीं मां गंगा

संगम क्षेत्र में गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही मां गंगा की जलधारा मंदिर परिसर तक पहुंच गई। मान्यता है कि जब-जब गंगा मैया का जल लेटे हनुमान जी की प्रतिमा तक पहुंचता है, तब इसे विशेष आध्यात्मिक अवसर माना जाता है। रविवार को भी जलधारा ने बजरंगबली की प्रतिमा को स्पर्श किया। श्रद्धालुओं ने इसे मां गंगा का अपने आराध्य भक्त हनुमान के प्रति स्नेह और श्रद्धा का प्रतीक बताया।

दर्शन को उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

हनुमान जी के जलमग्न स्वरूप के दर्शन के लिए मंदिर के आसपास श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। भक्तों ने दूर से ही हाथ जोड़कर बजरंगबली के दर्शन किए और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर और आसपास का वातावरण ‘जय श्रीराम’, ‘जय बजरंगबली’ और ‘हर-हर गंगे’ के जयघोष से गूंज उठा। भक्तों ने गंगा मैया और संकटमोचन के इस दिव्य मिलन को अपने लिए सौभाग्य का क्षण बताया।

धर्म और आस्था का अद्भुत संगम

पौराणिक मान्यता के अनुसार संगम नगरी में लेटे हनुमान जी का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त हनुमान जी यहां विश्राम मुद्रा में विराजमान हैं। गंगा का जल प्रतिमा तक पहुंचना श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का विषय है। संगम, गंगा और लेटे हनुमान जी की यह त्रिवेणी प्रयागराज की सनातन धार्मिक परंपरा और आध्यात्मिक महिमा को और विशिष्ट बना देती है।

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