

4000 Crore India Bhutan Rail Project: भारत और भूटान के बीच ऐतिहासिक संबंधों को एक नई ऊंचाई देने और रणनीतिक सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए भारतीय रेलवे ने एक बेहद बड़ा कदम उठाया है। असम के कोकराझार से भूटान के गेलेफू तक रेलवे लाइन बिछाने का काम बेहद तेजी से चल रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के लिए बस तीन साल का इंतजार बचा है। यह केवल एक रेल कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि सीमा पर चीन की विस्तारवादी नीति और चालबाजी का मुकाबला करने के लिए भारत का एक बहुत बड़ा रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।
भारत ने असम के कोकराझार से भूटान के गेलेफू तक 69 किलोमीटर लंबी रेलवे परियोजना पर काम की रफ्तार को काफी तेज कर दिया है। इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत लगभग 4,000 करोड़ रुपये आंकी गई है। परियोजना की संवेदनशीलता और महत्व को देखते हुए भारत सरकार ने इसे 'विशेष रेल परियोजना' का दर्जा दिया है। इस प्रोजेक्ट के बजट की बात करें, तो भारत में आने वाले हिस्से का पूरा खर्च भारतीय रेलवे खुद उठाएगी। वहीं, भूटान की सीमा के भीतर होने वाले निर्माण कार्य में भारत सरकार निवेश करेगी, जिसमें भूटान की तरफ से भी अपनी हिस्सेदारी और सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
भारत और भूटान के बीच लगभग 700 किलोमीटर लंबा बॉर्डर है। ऐसे में दोनों देशों के बीच रेलवे कनेक्टिविटी होना रणनीतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह रेलवे लाइन भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में भारत की सामरिक पहुंच को अत्यधिक मजबूत करेगी। रिपोर्ट के अनुसार, किसी भी आपातकालीन स्थिति में सीमावर्ती क्षेत्रों में भारतीय सेना के साजोसामान, सैन्य रसद और जरूरी संसाधनों की रियल-टाइम आपूर्ति को इसके जरिए बेहद सुगम और तेज बनाया जा सकेगा। यह सीधे तौर पर चीनी विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ भूटान को सुरक्षा कवच प्रदान करने के साथ-साथ भारत को भी मजबूत रणनीतिक बढ़त देगा।
यह भारत देश का एकमात्र रेल प्रोजेक्ट नहीं है जो इस क्षेत्र में बन रहा है। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल के बनारहाट से भूटान के औद्योगिक शहर समत्से तक 20 किलोमीटर का एक और रेलवे कॉरिडोर तैयार किया जा रहा है। इन रेल परियोजनाओं के जरिए भारत अपने सबसे संवेदनशील क्षेत्र 'चिकन नेक' की सुरक्षा को बेहद मजबूत कर रहा है। 'चिकन नेक' उस संकरे गलियारे को कहा जाता है जो पूर्वोत्तर भारत के राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। इसके इर्द-गिर्द मजबूत रेलवे नेटवर्क का विकास होने से भारतीय सुरक्षा बलों को त्वरित रणनीतिक बढ़त हासिल होगी।
रणनीतिक सुरक्षा के अलावा, इस ऐतिहासिक रेल लिंक से दोनों मित्र देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंध भी मजबूत होंगे। भूटान के गेलेफू और समत्से शहर इस रेल नेटवर्क से सीधे जुड़ जाएंगे, जो वर्तमान में भूटान के मुख्य आयात और निर्यात हब हैं। इससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में भारी उछाल आएगा। इसके साथ ही, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी जुड़ाव और नागरिक संपर्क भी पहले से कहीं अधिक बेहतर और सुगम हो जाएगा।