गुरु परंपरा का अद्भुत संगम; 29 जुलाई को निकलेगी मुड़िया शोभायात्रा, जानिए इस परपंरा की कैसे हुई शुरूआत

Mudia Purnima Mela: गोवर्धन में 29 जुलाई को गौड़ीय संप्रदाय की लगभग 470 वर्ष पुरानी पारंपरिक मुड़िया शोभायात्रा श्रद्धा और हरिनाम संकीर्तन के साथ निकलेगी। देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु शामिल होंगे।
470-Year-Old Gaudiya Mudia Procession to Be Held Govardhan on July 29
मुड़िया पूर्णिमा (सोर्स- फोटो नवभारत)
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Govardhan Mudia Purnima Mela: ब्रजभूमि में विश्व प्रसिद्ध मुड़िया पूर्णिमा मेले की आध्यात्मिक छटा अपने चरम पर है। गिरिराज धाम गोवर्धन में 29 जुलाई को गौड़ीय (मनमाध्व) संप्रदाय के संतों द्वारा लगभग 470 वर्ष पुरानी पारंपरिक मुड़िया शोभायात्रा श्रद्धा, भक्ति और हरिनाम संकीर्तन के साथ निकाली जाएगी। इस पावन आयोजन की तैयारियों के अंतर्गत सोमवार को श्री राधा श्याम सुंदर मंदिर में सभी मुड़िया संतों ने महामंत्र संकीर्तन के मध्य विधि-विधान से सिर का मुंडन कराया और गुरु परंपरा के प्रति अपनी अटूट आस्था व्यक्त की।

भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन रहते थे श्रीपाद सनातन गोस्वामी

गौड़ीय संप्रदाय की मान्यता के अनुसार पश्चिम बंगाल के रामकेली निवासी आचार्य श्रीपाद सनातन गोस्वामी, श्री चैतन्य महाप्रभु की प्रेरणा से ब्रजधाम आए और उन्होंने गोवर्धन को अपनी तपोभूमि बनाया। वे प्रतिदिन वृंदावन से आकर गिरिराज महाराज की सप्तकोसीय परिक्रमा करते, हरिनाम संकीर्तन करते और भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन रहते थे। मुंडित मस्तक रहकर साधना करने के कारण उन्हें श्रद्धापूर्वक 'मुड़िया बाबा' कहा जाने लगा।

जानें कैसे हुई इस परपंरा की शुरूआत

वर्ष 1556 में गुरु पूर्णिमा के दिन सनातन गोस्वामी के गोलोकवास के उपरांत उनके शिष्यों ने गुरु की अंतिम इच्छा और परंपरा का पालन करते हुए सिर का मुंडन कराया तथा उनके पार्थिव शरीर के साथ गिरिराज महाराज की परिक्रमा की। तभी से गुरु पूर्णिमा पर मुड़िया शोभायात्रा निकालने की यह दिव्य परंपरा निरंतर चली आ रही है।

29 जुलाई की प्रातः चकलेश्वर स्थित श्री राधा श्याम सुंदर मंदिर से मुड़िया संत ढप, ढोल, मृदंग और करताल की मधुर ध्वनि तथा हरिनाम संकीर्तन के साथ नृत्य करते हुए शोभायात्रा प्रारंभ करेंगे। यह यात्रा मानसी गंगा की परिक्रमा करते हुए महाप्रभु मंदिर पहुंचेगी। मार्ग में श्रद्धालु पुष्पवर्षा कर संतों का स्वागत करेंगे और गिरिराज महाराज के जयघोष से पूरा ब्रज गुंजायमान होगा।

मुड़िया शोभायात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा, वैष्णव भक्ति और सनातन संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। देश-विदेश से आने वाले हजारों श्रद्धालु इस दिव्य आयोजन के साक्षी बनकर गिरिराज महाराज की कृपा और गुरु भक्ति का अनुपम अनुभव प्राप्त करते हैं।

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