Fatehpur Government School: सरकारी विद्यालयों को लेकर अभिभावकों के बीच बनी झिझक अब धीरे-धीरे भरोसे में बदल रही है। फतेहपुर के हसवा विकासखंड स्थित प्राथमिक विद्यालय एकारी द्वितीय इसका उदाहरण बनकर सामने आया है। शिक्षकों की मेहनत, नवाचारपूर्ण शिक्षण, बेहतर शैक्षिक माहौल और अभिभावकों से लगातार संवाद का असर विद्यालय में साफ दिखाई दे रहा है। वर्तमान में विद्यालय में 168 बच्चों का नामांकन है और करीब 90 प्रतिशत बच्चे नियमित रूप से विद्यालय पहुंच रहे हैं। खास बात यह है कि इनमें 25 बच्चे निजी विद्यालयों से पढ़ाई छोड़कर यहां दाखिला लेने पहुंचे हैं।
विद्यालय के शिक्षकों के अनुसार पिछले करीब चार वर्षों से यहां छात्र संख्या लगातार बढ़ रही है। अभिभावक अब बच्चों को निजी विद्यालयों के बजाय प्राथमिक विद्यालय एकारी द्वितीय में पढ़ाने में रुचि दिखा रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि यहां बच्चों की पढ़ाई के साथ उनकी गतिविधियों और व्यक्तिगत जरूरतों पर भी ध्यान दिया जाता है। शिक्षकों द्वारा बच्चों के साथ नियमित संवाद और अभिभावकों से संपर्क का भी सकारात्मक असर पड़ा है।
विद्यालय में बच्चों को गर्मी से राहत देने के लिए वातानुकूलित कक्षाओं की व्यवस्था की गई है। ग्राम प्रधान के सहयोग से विद्यालय में टाइल्स सहित अन्य कार्य भी कराए गए हैं। शिक्षकों का कहना है कि बेहतर भौतिक वातावरण का सीधा असर बच्चों की उपस्थिति और पढ़ाई में रुचि पर पड़ता है। कक्षा शिक्षण को रोचक बनाने के लिए शिक्षण सामग्री, गतिविधियों और नवाचारों का प्रयोग किया जाता है।
विद्यालय के बच्चों ने पढ़ाई के साथ पठन-पाठन आधारित गतिविधियों में भी अपनी प्रतिभा दिखाई है। बेसिक शिक्षा विभाग के सुपर-30 और सुपर-20 रीडर्स अभियान में विद्यालय के बच्चों का चयन हुआ है। विद्यालय के अनुसार सुपर-30 में 10 और सुपर-20 में 20 बच्चों का चयन किया गया है। अभियान के तहत बच्चों को पुस्तकालय की किताबें पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। एक महीने में 30 पुस्तकें पढ़ने वाले बच्चों को सुपर-30 और 20 पुस्तकें पढ़ने वाले बच्चों को सुपर-20 में चयनित किया जाता है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर चयनित बच्चों को खंड शिक्षा अधिकारी ने सम्मानित भी किया।
विद्यालय में बच्चों की नियमित उपस्थिति को लेकर भी शिक्षक सक्रिय रहते हैं। बिना कारण विद्यालय नहीं आने वाले बच्चों के अभिभावकों से फोन पर संपर्क कर अनुपस्थिति की वजह पूछी जाती है। जरूरत पड़ने पर बच्चों को विद्यालय लाकर पढ़ाई से जोड़ा जाता है। इसके अलावा समय-समय पर अभिभावक बैठक आयोजित कर बच्चों की पढ़ाई और उपस्थिति पर चर्चा की जाती है। शिक्षकों के मुताबिक इन प्रयासों का परिणाम 90 प्रतिशत के करीब नियमित उपस्थिति के रूप में सामने आया है।
विद्यालय की बढ़ती छात्र संख्या के बीच कमरों की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है। विद्यालय में वर्तमान में केवल तीन कमरे हैं। प्रधानाध्यापक का अलग कार्यालय भी नहीं है। जिस स्थान का इस्तेमाल कार्यालय के लिए होना चाहिए, वहां बच्चों के लिए भोजन तैयार किया जाता है। प्रधानाध्यापक संत शरण सिंह चौहान के अनुसार विद्यालय में कम से कम दो अतिरिक्त कमरों की आवश्यकता है। जगह की कमी के कारण कई बार इच्छुक बच्चों को प्रवेश देना भी मुश्किल हो जाता है।
ग्राम प्रधान मंजू देवी ने बताया कि विद्यालय के शिक्षक बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं। ग्राम पंचायत की ओर से भी विद्यालय को आवश्यक सहयोग दिया जा रहा है। वहीं, खंड शिक्षा अधिकारी हसवा श्रवण कुमार पाल ने विद्यालय के शैक्षिक और भौतिक परिवेश में हुए सुधार की सराहना की। उन्होंने विद्यालय के प्रधानाध्यापक, शिक्षक ज्ञानेंद्र सिंह और पूरे स्टाफ के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।
विद्यालय के सहायक अध्यापक ज्ञानेंद्र सिंह के मुताबिक बच्चों को रोचक गतिविधियों और नवाचार के माध्यम से पढ़ाया जाता है। निजी विद्यालय छोड़कर आए 25 बच्चों का दाखिला और लगातार बढ़ती छात्र संख्या शिक्षकों के प्रयासों के प्रति अभिभावकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है।
प्राथमिक विद्यालय एकारी द्वितीय में वर्तमान में 168 बच्चे पंजीकृत हैं। विद्यालय के अनुसार करीब 90 प्रतिशत बच्चे नियमित रूप से स्कूल पहुंचते हैं। पिछले चार वर्षों से छात्र संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।
विद्यालय में पढ़ने वाले 25 बच्चे पहले निजी विद्यालयों में पढ़ रहे थे। अभिभावकों ने शिक्षकों की मेहनत, बच्चों पर व्यक्तिगत ध्यान और गतिविधि आधारित शिक्षण को देखते हुए अपने बच्चों का दाखिला यहां कराया। सुपर-30 और सुपर-20 रीडर्स अभियान में विद्यालय के 30 बच्चों का चयन हुआ है। इनमें 10 बच्चे सुपर-30 और 20 बच्चे सुपर-20 में शामिल हुए। पुस्तकालय की पुस्तकों को पढ़ने के लिए बच्चों को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है।
विद्यालय की बढ़ती छात्र संख्या के बीच तीन कमरों में पढ़ाई कराना चुनौती बना हुआ है। प्रधानाध्यापक के अनुसार कम से कम दो अतिरिक्त कमरों की जरूरत है। अतिरिक्त कक्ष उपलब्ध होने पर अधिक बच्चों को प्रवेश देने और शिक्षण व्यवस्था को विस्तार देने में मदद मिलेगी।