

Allahabad University Vice Chancellor Sangeeta Srivastava: पूरब का ऑक्सफोर्ड कहे जाने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय के लिए 23 सितंबर का दिन इस बार दोहरी खुशी लेकर आया है। विश्वविद्यालय के 140वें स्थापना दिवस के मौके पर प्रो. संगीता श्रीवास्तव को दूसरे कार्यकाल के लिए कुलपति नियुक्त किए जाने का आदेश जारी हुआ है। राष्ट्रपति एवं विश्वविद्यालय की विजिटर द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद शिक्षा मंत्रालय ने नियुक्ति संबंधी आदेश जारी किया है। उनका नया कार्यकाल 16 सितंबर 2026 से पांच वर्ष के लिए होगा या 70 वर्ष की आयु पूरी होने तक, जो पहले हो।
यह नियुक्ति इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इतिहास में इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रो. संगीता श्रीवास्तव विश्वविद्यालय की पहली ऐसी कुलपति हैं, जिन्हें लगातार दूसरे पूर्ण कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया है। वह 30 नवंबर 2020 को विश्वविद्यालय की पहली महिला कुलपति के रूप में पदभार संभाल चुकी हैं। साथ ही केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद विश्वविद्यालय के अपने ही किसी नियमित शिक्षक का कुलपति बनने का भी यह पहला मामला था।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय की स्थापना 23 सितंबर 1887 को हुई थी। विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक यह देश के सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में चौथे स्थान पर है। इसके पीछे तत्कालीन संयुक्त प्रांत के लेफ्टिनेंट गवर्नर सर विलियम म्योर की पहल महत्वपूर्ण रही। विश्वविद्यालय की स्थापना से पहले 1873 में म्योर सेंट्रल कॉलेज की आधारशिला रखी गई थी। 1887 में विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद यहां से उच्च शिक्षा की एक लंबी परंपरा शुरू हुई, जिसने इसे देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में स्थापित किया।
प्रो. संगीता श्रीवास्तव का विश्वविद्यालय से संबंध कुलपति बनने से काफी पहले का है। वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय के होम साइंस विभाग से जुड़ी रहीं और विभाग को स्वतंत्र पहचान दिलाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। विश्वविद्यालय के अनुसार उनके प्रयासों से विभाग ने 1998-99 में अपनी स्वतंत्र पहचान दोबारा हासिल की। बाद में टेक्सटाइल एंड अपैरल डिजाइनिंग तथा फूड एंड न्यूट्रिशन जैसे पाठ्यक्रम भी शुरू हुए। वह लंबे समय तक विभागाध्यक्ष रहीं। उनका शोध क्षेत्र नेचुरल डाई, एरोमैटिक फिनिश और फंक्शनल क्लोदिंग से संबंधित रहा है।
कुलपति बनने से पहले वह रज्जू भैया विश्वविद्यालय की कुलपति भी रह चुकी थीं। 2020 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की पहली महिला कुलपति बनकर उन्होंने कार्यभार संभाला।
प्रो. श्रीवास्तव के पहले कार्यकाल में विश्वविद्यालय में बड़े स्तर पर शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्तियां हुईं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार उनके कार्यकाल में 377 शिक्षक और 616 गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति हुई, जबकि करीब एक हजार कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिला। विश्वविद्यालय में नए छात्रावास, शैक्षणिक भवन, सांस्कृतिक केंद्र और अन्य सुविधाओं का भी विस्तार हुआ।
उनके पहले कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों में विश्वविद्यालय का NAAC में A+ ग्रेड हासिल करना भी शामिल है। नवंबर 2025 में पुनर्मूल्यांकन के बाद विश्वविद्यालय को 3.26 CGPA के साथ A+ ग्रेड मिला। इससे पहले विश्वविद्यालय को A ग्रेड प्राप्त हुआ था। NAAC के पुनर्मूल्यांकन में शोध, शिक्षण, डिजिटल संसाधन, बुनियादी ढांचे और विद्यार्थी-केंद्रित पहलों में सुधार का उल्लेख किया गया था।
अब दूसरे कार्यकाल में विश्वविद्यालय के सामने अपनी शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध, नियुक्तियों, आधारभूत ढांचे और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय अकादमिक पहचान को और मजबूत करने की चुनौती होगी। स्थापना दिवस पर जारी हुआ यह नियुक्ति आदेश विश्वविद्यालय के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ता है।