

कंटेनर निर्माण क्षमता 10 गुना बढ़ाने का लक्ष्य
योजना से 53 हजार से अधिक रोजगार के अवसर
10 हजार करोड़ की कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग योजना को मंजूरी
Shipping Container Manufacturing In India: समुद्र के रास्ते दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचने वाला भारत का कारोबार अब एक नई करवट लेने जा रहा है। अब तक शिपिंग कंटेनरों की जरूरत पूरी करने के लिए विदेशी बाजारों पर निर्भर रहने वाले भारत की तस्वीर बदलने की तैयारी है। केंद्र सरकार ने ऐसा दांव चला है, जिससे आने वाले वर्षों में भारत खुद विश्वस्तरीय शिपिंग कंटेनरों का बड़ा निर्माता और निर्यातक बन सकता है। इसके लिए सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट खोल दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम को मंजूरी दे दी है। यह योजना वित्त वर्ष 2039-40 तक लागू रहेगी। इसका मकसद सिर्फ देश में कंटेनर बनाना नहीं, बल्कि भारत को वैश्विक कंटेनर निर्माण के नक्शे पर मजबूत पहचान दिलाना है।
नरेंद्र मोदी सरकार ने इस योजना को तीन हिस्सों में बांटा है। पहला, 859 करोड़ रुपये ब्याज सब्सिडी के लिए रखे गए हैं। इसके तहत नई फैक्ट्रियां लगाने और मौजूदा इकाइयों का विस्तार करने के लिए पात्र टर्म लोन पर सालाना 3 प्रतिशत ब्याज सहायता मिलेगी।
दूसरा, 8,891 करोड़ रुपये परिचालन खर्च में सहायता के लिए निर्धारित किए गए हैं। इसके जरिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बने और पात्र निर्माताओं द्वारा बेचे गए कंटेनरों को वित्तीय सहायता मिलेगी। इससे भारतीय कंपनियों की उत्पादन लागत का अंतर कम होगा और वे विदेशी कंपनियों को टक्कर देने की स्थिति में आ सकेंगी।
तीसरा, 150 करोड़ रुपये टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन सुविधाओं के विकास पर खर्च होंगे। इसमें डायनामिक लॉन्गिट्यूडिनल इम्पैक्ट टेस्टिंग जैसी आधुनिक परीक्षण सुविधाएं स्थापित की जाएंगी।
इस योजना का सबसे बड़ा लक्ष्य भारत की कंटेनर निर्माण क्षमता को लगभग 10 गुना बढ़ाकर 7.5 लाख TEU तक पहुंचाना है। TEU यानी ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट, कंटेनर क्षमता मापने की अंतरराष्ट्रीय इकाई है।
इससे भारत में घरेलू मांग पूरी करने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कंटेनर निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
सरकार के अनुमान के मुताबिक, इस योजना से करीब 3,000 प्रत्यक्ष और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। इसका फायदा सिर्फ कंटेनर बनाने वाली कंपनियों को नहीं मिलेगा, बल्कि विशेष स्टील, कॉर्नर कास्टिंग, लकड़ी के फ्रेम और पेंट जैसे सहायक उद्योगों को भी मिलेगा।
कंटेनर अंतरराष्ट्रीय व्यापार की रीढ़ माने जाते हैं। आयात-निर्यात से लेकर समुद्री लॉजिस्टिक्स तक इनकी अहम भूमिका होती है। ऐसे में घरेलू उत्पादन बढ़ने से भारत की सप्लाई चेन अधिक मजबूत हो सकती है और विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता घट सकती है।
केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित यह पहल आने वाले वर्षों में भारत के विनिर्माण क्षेत्र के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि 10 हजार करोड़ रुपये की यह योजना जमीन पर कितनी तेजी से उतरती है और भारत वैश्विक कंटेनर बाजार में अपनी कितनी मजबूत जगह बना पाता है।