Prayagraj: यमुनापार में मतदाता सूची से ग्राम प्रधान सहित 500 से अधिक नाम गायब, ग्रामीणों ने की जांच की मांग

Prayagraj Voter List Dispute: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के कोरांव तहसील स्थित डीही खुर्द ग्राम पंचायत में पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची से 500 से अधिक नाम गायब होने का मामला सामने आया है।
Prayagraj Panchayat Election Row: Over 500 Names Missing from Voter List
मतदाता सूची (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Prayagraj Panchayat Election Voter List: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के यमुनापार के कोरांव तहसील क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत डीही खुर्द में पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि अंतिम प्रकाशित मतदाता सूची से 500 से अधिक मतदाताओं के नाम गायब हो गए हैं, जिससे गांव में असंतोष और नाराजगी का माहौल है।

महिला प्रधान के नाम भी गायब

ग्रामीणों के अनुसार पूर्व में ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में कुल 1527 मतदाता दर्ज थे। लेकिन अंतिम सूची जारी होने के बाद बड़ी संख्या में नाम नहीं दिखाई दे रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि सूची से मौजूदा महिला प्रधान रेखा देवी, कृष्णकांत मिश्र सहित कई अन्य लोगों के नाम भी गायब बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अनेक परिवारों के एक या एक से अधिक सदस्यों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। जिससे लोगों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

मतदाता सूची में हुई इस कथित गड़बड़ी को लेकर ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से शिकायत की है। उनका कहना है कि चुनाव जैसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया में इस प्रकार की लापरवाही से लोगों के मतदान का अधिकार प्रभावित हो सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा सभी पात्र मतदाताओं के नाम सूची में शामिल करने की मांग की है।

लेखपाल ने बताया तकनीकी त्रुटि

इस मामले को लेकर क्षेत्रीय लेखपाल का कहना है कि मतदाता सूची तैयार करने के दौरान तकनीकी त्रुटि के कारण कुछ नाम छूट गए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि शिकायतों का सत्यापन कर छूटे हुए नामों को जल्द ही सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, ताकि किसी भी पात्र मतदाता को मतदान के अधिकार से वंचित न होना पड़े।

वहीं, ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते मतदाता सूची में सुधार नहीं किया गया और सभी पात्र नागरिकों के नाम पुनः दर्ज नहीं किए गए, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि लोकतंत्र में मतदान का अधिकार सबसे महत्वपूर्ण अधिकारों में से एक है और इसके साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

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