इलाहाबाद हाईकोर्ट (सोर्स- सोशल मीडिया) 
प्रयागराज

हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी: चरित्र प्रमाणपत्र में सिर्फ आपराधिक इतिहास नहीं, व्यक्ति के आचरण का भी हो उल्लेख

Allahabad High Court Verdict: हाईकोर्ट ने औरैया SSP को फटकार लगाते हुए कहा कि चरित्र प्रमाणपत्र में केवल आपराधिक इतिहास नहीं, बल्कि व्यक्ति के आचरण, सामाजिक छवि और प्रतिष्ठा का भी उल्लेख होना चाहिए।

स्निग्धा श्रीवास्तव

Allahabad High Court Verdict On Character Certificate: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चरित्र प्रमाणपत्र (Character Certificate) को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि इसका उद्देश्य केवल किसी व्यक्ति के आपराधिक मामलों का उल्लेख करना नहीं है। अदालत ने कहा कि चरित्र प्रमाणपत्र में व्यक्ति के सामान्य आचरण, सामाजिक छवि, प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता जैसे पहलुओं का भी समुचित उल्लेख होना चाहिए।

इसी टिप्पणी के साथ कोर्ट ने औरैया के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) द्वारा जारी चरित्र प्रमाणपत्र को "निंदा पत्र" जैसा बताते हुए कड़ी नाराजगी जताई और नया, विस्तृत चरित्र प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश दिया।

चरित्र केवल उसके आपराधिक इतिहास से तय नहीं होता

यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने सुमित सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। सुनवाई के दौरान अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता गिरिजेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि 10 जून 2026 को चरित्र प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया था, लेकिन उसे 24 जून को कोर्ट के निर्देश के बाद याचिकाकर्ता को सौंपा गया।

प्रमाणपत्र का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि यह चरित्र प्रमाणपत्र कम और निंदा पत्र अधिक प्रतीत होता है। इसमें केवल थाना, एलआईयू और जिला अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो से प्राप्त जानकारी के आधार पर दर्ज मुकदमों का उल्लेख किया गया है। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति का चरित्र केवल उसके आपराधिक इतिहास से तय नहीं होता।

संबंधित व्यक्ति की समाजिक छवि की जांच जरूरी

हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि पुलिस को यह भी जांच करनी चाहिए कि संबंधित व्यक्ति की समाज में कैसी छवि है, क्या उसे सज्जन और विश्वसनीय नागरिक माना जाता है, उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा कैसी है और उसके व्यवहार को लेकर लोगों की क्या धारणा है। यदि कोई पूर्ववृत्त हैं तो उनका संतुलित उल्लेख किया जा सकता है, लेकिन केवल मुकदमों की सूची देकर चरित्र प्रमाणपत्र जारी करना उचित नहीं है।

पुलिस द्वारा विस्तृत चरित्र प्रमाणपत्र जारी न करने पर दाखिल याचिका

खंडपीठ ने एसएसपी औरैया को नया एवं विस्तृत चरित्र प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश देते हुए व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने के भी आदेश दिए। मामला जमालीपुर निवासी सुमित सिंह के भारतीय सेना में चयन से जुड़ा है। सेना में ज्वाइनिंग के लिए उन्हें सीमित समय मिला है। याचिकाकर्ता के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट समेत कुछ धाराओं में मुकदमा दर्ज था, जिसमें संबंधित पक्षों के बीच समझौता हो चुका है। बावजूद इसके पुलिस द्वारा विस्तृत चरित्र प्रमाणपत्र जारी न किए जाने पर याचिका दाखिल की गई थी।

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