Allahabad High Court Order Forensic Science Training: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस और अभियोजन अधिकारियों को फोरेंसिक साइंस का नियमित प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने आतिश उर्फ कृष्णाकांत की याचिका पर सुनवाई करते हुए क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में तकनीकी सुधार और वैज्ञानिक साक्ष्यों के बेहतर इस्तेमाल को लेकर यह महत्वपूर्ण आदेश दिया।
कोर्ट ने कहा कि आधुनिक जांच व्यवस्था में फोरेंसिक विज्ञान की जानकारी के बिना पुलिस और अभियोजन पक्ष प्रभावी तरीके से मामलों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर सकता।
सुनवाई के दौरान एनसीबी नई दिल्ली के डिप्टी डायरेक्टर जनरल शशिकांत शर्मा और यूपी के एडिशनल डायरेक्टर जनरल (टेक्निकल) वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट के समक्ष पेश हुए। अधिकारियों ने बताया कि चार्जशीट के सर्किल ऑफिसर स्तर पर सत्यापन का विकल्प जोड़ा गया है।
इसके अलावा मेडलीपीआर और ई-फोरेंसिक लैब रिपोर्ट तक पहुंच की व्यवस्था पर भी काम चल रहा है। पोस्टमार्टम, यौन उत्पीड़न और चोट संबंधी रिपोर्ट अब सीसीटीएनएस के माध्यम से पुलिस को सीधे उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तिलहर थाने में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू पुलिस केस डायरी तक न्यायालय की पूरी पहुंच वाली व्यवस्था को पूरे उत्तर प्रदेश में लागू करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने फोरेंसिक विज्ञान की जानकारी की कमी पर भी चिंता जताई। न्यायालय ने कहा कि सरकारी वकील मामलों में उचित सहयोग नहीं कर पाते हैं।
कोर्ट ने प्रयागराज के तत्कालीन पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार और बुलंदशहर के तत्कालीन जिला जज व एसपी के प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के सहयोग से फोरेंसिक विज्ञान पर कौशल विकास कार्यशाला आयोजित की थी।
कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव विधि एवं न्याय और डीजीपी को निर्देश दिया कि राज्य के सभी सरकारी वकीलों और पुलिस अधिकारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। जिला न्यायाधीशों को भी अपने-अपने जिलों में न्यायिक अधिकारियों के लिए ऐसी कार्यशालाएं कराने को कहा गया। आदेशों के अधिकांश हिस्से का पालन होने के बाद हाईकोर्ट ने 17 सितंबर को मामले का अंतिम निस्तारण कर दिया।