हाईकोर्ट की पुलिस को फटकार (सांकेतिक फोटो) 
प्रयागराज

हाईकोर्ट की पुलिस को फटकार; थानों में CCTV बंद मिले तो SSP होंगे जवाबदेह, 11 अगस्त तक फुटेज पेश करने का आदेश

Allahabad High Court: हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी पुलिस थाने में बिजली कटने के कारण CCTV कैमरे बंद मिलते हैं और जनरेटर या सोलर बैकअप की व्यवस्था नहीं है, तो संबंधित जिले के SSP या SP जिम्मेदार होंगे।

स्निग्धा श्रीवास्तव

High Court Order On police Security Arrangements: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस थानों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़ी नाराजगी जताते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि यदि किसी थाने में बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण सीसीटीवी कैमरे बंद पाए जाते हैं और उनके लिए जनरेटर या सोलर पैनल जैसी बैकअप व्यवस्था उपलब्ध नहीं है, तो इसे पुलिस प्रशासन की गंभीर लापरवाही माना जाएगा। ऐसी स्थिति में संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक या वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) जवाबदेह होंगे।

देवरिया जिले के भलुअनी थाने से जुड़े एक मामले में की टिप्पणी

यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने देवरिया जिले के भलुअनी थाने से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की। याचिकाकर्ता नागेंद्र कुमार यादव ने आरोप लगाया था कि अप्रैल 2026 में उन्हें शिकायत दर्ज कराने जाने के दौरान अवैध रूप से पुलिस हिरासत में रखा गया था।

सुनवाई के दौरान एसपी देवरिया की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि भलुअनी थाने का जनरेटर दिसंबर 2024 से खराब था और सोलर पैनल भी काम नहीं कर रहा था। मरम्मत के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए और उच्च अधिकारियों को भी इसकी जानकारी नहीं दी गई। वहीं बिजली विभाग के अनुसार पांच अप्रैल 2026 को गांव में 18 घंटे बिजली आपूर्ति निर्धारित थी, लेकिन वास्तविक आपूर्ति लगभग 13 घंटे ही हो सकी।

सीसीटीवी हार्ड डिस्क पर भी कोर्ट ने जताई नाराजगी

कोर्ट ने थाना प्रभारी प्रदीप कुमार पांडेय से सीसीटीवी की हार्ड डिस्क की स्थिति पूछी। संतोषजनक जवाब न मिलने पर अदालत ने नाराजगी जताई। थाना प्रभारी ने बताया कि वह 31 अगस्त 2025 से इस थाने में तैनात हैं, लेकिन हार्ड डिस्क की मरम्मत के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। हालांकि अदालत को आश्वस्त किया गया कि तीन-चार दिन में जनरेटर ठीक करा लिया जाएगा।

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि सीसीटीवी की हार्ड डिस्क सुरक्षित है। इस पर हाईकोर्ट ने 11 अगस्त तक पेन ड्राइव में सीसीटीवी फुटेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि एसपी ने आठ जुलाई 2026 को थाना प्रभारी के आचरण को गंभीर कर्तव्य-विचलन मानते हुए प्रारंभिक जांच के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट की यह टिप्पणी पुलिस थानों में निगरानी व्यवस्था को लेकर जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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