इलाहाबाद हाई कोर्ट सोर्स- सोशल मीडिया
प्रयागराज

आदेशों के टालमटोल पर पर भड़का इलाहाबाद हाईकोर्ट, DGP और महाधिवक्ता को किया तलब; जानें क्या है पूरा मामला

UP Police News: पुलिस की लापरवाही और टाल-मटोल पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। कोर्ट ने DGP और महाधिवक्ता को 24 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया।

ओमप्रकाश सिंह परिहार, अमन मौर्या

Allahabad High Court Summons DGP: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अदालत के आदेशों के पालन में पुलिस अधिकारियों की ओर से कथित लापरवाही और टाल-मटोल को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने पुलिस प्रमुख (डीजीपी) तथा महाधिवक्ता को 24 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति समीर जैन की एकलपीठ ने महोबा के श्रीनगर थाने में दर्ज हत्या के मामले में आरोपी पुष्पराज सिंह उर्फ बबलू की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया।

दो बार पत्र भेजने के बावजूद हलफनामा नहीं

19 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सरकारी वकील प्रथम डॉ. एसबी मौर्य ने कोर्ट को बताया कि संबंधित जानकारी के लिए दो बार पत्र भेजे गए थे, लेकिन जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए कोई अधिकारी उपस्थित नहीं हुआ। इस पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे अदालत का घोर अनादर बताया।

हत्या के मामलों में जमानत पर चिंता

कोर्ट ने कहा कि वर्तमान समय में अदालत को इस तरह की समस्याओं का अक्सर सामना करना पड़ रहा है। पुलिस अधिकारियों के रवैये के कारण हत्या जैसे गंभीर मामलों में जमानत अर्जियां लंबे समय तक लंबित रहती हैं। अदालत ने इसी कारण डीजीपी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया।

पुलिस कमिश्नर को तलब करने का आदेश वापस

इसी सुनवाई से जुड़े दूसरे मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गौतमबुद्धनगर के पुलिस कमिश्नर को व्यक्तिगत रूप से तलब करने का अपना आदेश वापस ले लिया। न्यायमूर्ति समीर जैन की एकलपीठ ने राज्य सरकार की रिकॉल अर्जी स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया।

सीसीटीवी फुटेज को लेकर मांगी थी जानकारी

मामला सन्नी नामक आरोपी की जमानत याचिका से जुड़ा है। आरोपी के खिलाफ नॉलेज पार्क थाने में हत्या का मामला दर्ज है। कोर्ट ने 14 जुलाई को राज्य सरकार से हलफनामे में यह जानकारी मांगी थी कि सीसीटीवी फुटेज में आवेदक की पहचान हुई है या नहीं। तय तारीख तक जवाब दाखिल नहीं होने पर 19 अगस्त को कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की थी।

राज्य सरकार की ओर से रिकॉल

अर्जी में बताया गया कि 14 जुलाई का आदेश जांच अधिकारी तक पहुंचा ही नहीं था। इसी तथ्य को देखते हुए कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को व्यक्तिगत रूप से तलब करने का आदेश वापस ले लिया।

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