अखिलेश यादव और फिल्म का पोस्टर।  
उत्तर प्रदेश

यूपी में फिल्म को लेकर सियासी तूफान खड़ा, 'यादव जी की लव स्टोरी' पर अखिलेश यादव क्या बोल गए?

Yadav Ji Ki Love Story Controversy : फिल्म यादव जी की लव स्टोरी को लेकर यूपी में सियासी बवाल खड़ा हो गया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे एक खास समाज को बदनाम करने की साजिश करार दिया है।

रंजन कुमार

Akhilesh Yadav on Yadav Ji Ki Love Story : उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों एक फिल्म के नाम ने उबाल पैदा कर दिया है। यादव जी की लव स्टोरी नामक फिल्म को लेकर छिड़ा विवाद अब सिनेमाघरों से निकलकर राजनीतिक अखाड़े में पहुंच गया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की इस विवाद में एंट्री ने मामले को और भी ज्यादा गर्मा दिया है। अखिलेश यादव ने इस फिल्म को समाज में नफरत और विद्वेष फैलाने की एक गहरी साजिश करार दिया है।

अखिलेश यादव ने इस फिल्म पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी को घेरे में लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी फिल्में बीजेपी के इशारे पर और उनके एजेंडे को धार देने के लिए बनाई जाती हैं। अखिलेश ने कहा कि बीजेपी केवल ऐसी ही नफरती लव स्टोरी बनाना जानती है। पहले ब्राह्मण समाज को अपमानित करने के लिए फिल्में और सीरीज बनाई गईं और अब यादव समाज को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने बिना नाम लिए घूसखोर पंडित जैसी वेब सीरीज का भी हवाला दिया और कहा कि यह सब जातियों को आपस में लड़ाने और उन्हें बदनाम करने का खेल है।

विरोध की वजह : क्या है फिल्म की कहानी?

27 फरवरी को रिलीज होने वाली इस फिल्म का विरोध मुख्य रूप से इसके कथानक को लेकर हो रहा है। यादव समाज के संगठनों का दावा है कि फिल्म में लड़की यादव समुदाय से है और लड़का मुस्लिम दिखाया गया है, जिसे कथित तौर पर लव जिहाद के नजरिए से पेश करने की कोशिश की गई है। संभल, फिरोजाबाद, मैनपुरी और इटावा जैसे यादव बाहुल्य जिलों में फिल्म के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि जब फिल्म की स्टार कास्ट या प्रोडक्शन में कोई यादव नहीं है तो फिर इस उपनाम का इस्तेमाल समाज को बदनाम करने के लिए क्यों किया जा रहा है?

राजनीतिक समीकरण और असर

जानकारों का मानना है कि अखिलेश यादव का यह कड़ा रुख सीधे तौर पर 2027 के विधानसभा चुनावों से जुड़ा है। यादव समाज सपा का कोर वोट बैंक है, और पिछले कुछ चुनावों में बीजेपी ने इस वोट बैंक में सेंध लगाने की पुरजोर कोशिश की है। ऐसे में अखिलेश इस विवाद के जरिए अपने आधार को यह संदेश देना चाहते हैं कि उनके हितों की रक्षा के लिए वे सबसे आगे खड़े हैं।

निर्माता पक्ष की सफाई और भविष्य

दूसरी ओर फिल्म की अभिनेत्री प्रगति तिवारी ने सफाई देते हुए कहा है कि फिल्म का मकसद किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। वैसे, अब दबाव इतना बढ़ गया है कि उत्तर प्रदेश के कई जिलों में जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर फिल्म पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की जा रही है। अखिलेश यादव के इस बयान के बाद अब सबकी नजरें योगी सरकार और सेंसर बोर्ड पर टिकी हैं कि क्या इस विवादित फिल्म को हरी झंडी मिल पाती है या नहीं।

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