मुलायल सिंह यादव AI Generated Image
उत्तर प्रदेश

Mulayam Singh Yadav: पहलवानी के चरखा दांव से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक, ऐसा रहा उनका UP का सियासी सफर

Mulayam Singh Yadav Biography: मुलायम सिंह यादव की पुण्यतिथि पर जानें उनके जीवन और राजनीतिक सफर की कहानी। सैफई के अखाड़े से यूपी के मुख्यमंत्री और देश के रक्षा मंत्री बनने तक का सफर।

प्रिया जैस

Mulayam Singh Yadav Political Journey: उत्तर प्रदेश की राजनीति में सबसे बड़े नामों में से एक थे मुलायम सिंह यादव। अपनी साधारण पृष्ठभूमि और बेहतरीन राजनीतिक चालों के लिए मशहूर, उनका करियर पारंपरिक कुश्ती (दंगल) की दुनिया और बड़े दांव-पेच वाली चुनावी राजनीति के बीच एक अनोखा मेल था।

मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश और भारतीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक थे। सार्वजनिक जीवन में आने से पहले, मुलायम सिंह यादव अपने गांव सैफई में एक उत्साही पहलवान थे। उन्हें अपने खास दांव 'चरखा दांव' के लिए प्रसिद्धि मिली।

कुश्ती से जुड़ाव और 'चरखा दांव' का किस्सा

'चरखा दांव' यह कुश्ती की एक ऐसी तकनीक थी जिससे वे विरोधियों को जमीन पर पटक देते थे, कभी-कभी तो बिना हाथों का इस्तेमाल किए ही। लोगों के बीच यह बात मशहूर थी कि जवानी के दिनों में जब वे किसी विरोधी की कमर पकड़ लेते थे, तो विरोधी शायद ही उससे छूट पाते थे।

हालांकि स्कूल टीचर बनने के बाद उन्होंने सक्रिय कुश्ती छोड़ दी थी, लेकिन वे अपने आखिरी दिनों तक सैफई में हर साल कुश्ती टूर्नामेंट आयोजित करते रहे। राजनीतिक विश्लेषक अक्सर उनकी राजनीतिक कुशलता जो बिना किसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के हासिल हुई थी का श्रेय कुश्ती की रणनीतियों में उनकी महारत को देते थे।

राजनीति में प्रवेश और शुरुआती करियर

मुलायम सिंह यादव की राजनीतिक प्रतिभा को सबसे पहले प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के नेता नत्थू सिंह ने पहचाना, जिन्होंने उन्हें 1967 में जसवंतनगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया।

सिर्फ 28 साल की उम्र में उन्होंने चुनाव जीता और उस समय उत्तर प्रदेश के इतिहास में सबसे कम उम्र के विधायक बने। विधायक चुने जाने के बाद, उन्होंने अपनी मास्टर ऑफ आर्ट्स (M.A.) की डिग्री पूरी की। 1977 में, 38 साल की उम्र में, उन्हें राम नरेश यादव के नेतृत्व वाली जनता पार्टी की राज्य सरकार में सहकारिता मंत्री नियुक्त किया गया।

मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव

उत्तराधिकार और मुख्यमंत्री पद

वरिष्ठ किसान नेता चौधरी चरण सिंह ने मुलायम सिंह यादव को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी माना, जबकि अपने बेटे अजीत सिंह को अपना कानूनी उत्तराधिकारी घोषित किया। चरण सिंह के बीमार पड़ने के बाद, पार्टी के नेतृत्व को लेकर अजीत सिंह और मुलायम सिंह के बीच प्रतिद्वंद्विता पैदा हो गई।

मुलायम विजयी हुए और 5 दिसंबर 1989 को लखनऊ के केडी सिंह बाबू स्टेडियम में पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। पद संभालने के बाद, उन्होंने भावुक होकर कहा कि समाजवादी विचारक राम मनोहर लोहिया का यह सपना सच हो गया है कि एक गरीब परिवार का बच्चा मुख्यमंत्री बने।

मुलायम सिंह यादव

राजनीतिक सफर की अहम बातें और राष्ट्रीय भूमिका

मुलायम सिंह यादव तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। 1989, 1993 और 2003 में वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनें। उन्होंने 1996 तक लगातार जसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।

राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखते हुए, वे 1996 में पहली बार मैनपुरी से लोकसभा के लिए चुने गए और यूनाइटेड फ्रंट सरकार में 1996 से 1998 तक भारत के केंद्रीय रक्षा मंत्री रहे।

मुलायम सिंह यादव, योगी आदित्यनाथ

मुलायम सिंह यादव की आखिरी जीत

अपने कई दशकों के सफर के दौरान, उन्होंने मैनपुरी, संभल, कन्नौज और आजमगढ़ जैसे अहम निर्वाचन क्षेत्रों से कई बार संसदीय जीत हासिल की। ​​खास बात यह है कि उन्होंने 2014 के आम चुनावों में आजमगढ़ और मैनपुरी दोनों सीटें जीतीं और 2019 में मैनपुरी से अपनी आखिरी चुनावी जीत हासिल की थी।

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